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क्या आप वृंदावन से दूर रहकर भी वृंदावन वास चाहते हैं?

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                                                                                                                  वृन्दावन वास 'आशा जाकी जँह बसी तँह ताहि को वास ' मन श्री वृन्दावन में रहे। प्रारब्धवश शरीर बाहर हैं, तो यह वृन्दावन वास ही हैं और यदि शरीर वृन्दावन में हैं ,मन बाहर हैं तो यह उत्तम धाम वास नहीं कहा जायेगा। धाम से बाहर रहने से मन में प्रभु का ध्यान बना हुआ हैं तो प्रभु आपके पास ही हैं। आनन्दमय भगवदधाम में भगवान के नाम , रूप , लीला के सर्वत्र दर्शन होते हैं। अनन्य भक्त अपने घर में रहकर नाम , रूप , लीला का अनुभव करते हैं। उनका घर का निवास , धाम निवास के तुल्य हैं।                     अनंत गुण संपन्न परमात्मा आप सबका कल्याण करे। भगवद...