कागभुसुंडि जी कौन थे?
कागभुसुंडि जी कौन है? जब भोले बाबा मां गोरा को श्री रामचरितमानस की कथा सुना रहे थे तब अंत में गौरा मां ने प्रश्न किया कि मैं यह जानना चाहती हूं कि यह काग भुसुंडि जी कौन थे? जिनसे आपने कथा सुनी। हे कृपालु ! बताइए उसको इन्हीं प्रभु का यह पवित्र सुंदर चरित्र कहां पाया और हे कामदेव के शत्रु यह भी बताइए आपने इसे किस प्रकार सुना? मुझे बड़ा भारी कौतूहल हो रहा है। तब महादेव ने प्रसंग सुनाया। महादेव बोले हे सुमुखी! है सुलोचना ! प्रसंग सुनो, पहले तुम्हारा अवतार दक्ष के घर में हुआ था, तब तुम्हारा नाम सती था। दक्ष के यज्ञ में तुम्हारा अपमान हुआ। तब तुम ने अत्यंत विरोध करके प्राण त्याग दिए और फिर मेरे से सेवकों ने यज्ञ विध्वंस कर दिया।यह सब तुम जानती हो। तब मेरे मन में बड़ा सोच हुआ और हे प्रिय! मैं तुम्हारी वियोग से दुखी हो गया,मैं विरक्त भाव से सुंदरवन पर्वत नदी और तालाबों का दृश्य देखता फिरता था। सुमेरु पर्वत की उत्तर दिशा में और भी दूर एक बहुत ही सुंदर नील पर्वत है। उसकी सुंदर स्वर्ण में शिखर है। उनमें से चार सुंदर शिखर मेरे मन को बहुत ही अच्छे लगे। उनमें से एक बरगद, पीपल, पाकर और आम ...