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गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र भावार्थ के साथ

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                    गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र   भावार्थ के साथ गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र श्रीमद्भागवत महापुराण के अष्टम स्कंध में आता है। इसमें एक गजराज (हाथी) संकट में पड़कर भगवान विष्णु से प्रार्थना करता है। यह स्तोत्र बहुत प्रभावशाली है और संकट के समय भगवान की शरणागति का सर्वोत्तम उदाहरण है। यहाँ गजेंद्र द्वारा किया गया स्तोत्र दिया गया है: गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र श्रीगजेंद्र उवाच— ॐ नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम्। पुरुषायादि-बीजाय पारेसायाभिधीमहि ॥१॥ यस्येच्छया ततः सृष्टं येनैव पतितं स्वयम्। यस्मिन् चोत्तिष्ठते चैदं यस्मिंश्चायतमेश्वरम्॥२॥ योऽन्तः प्रविशतं ज्ञात्वा बीजं सन्तान-कारणम्। सर्वेषां जीवनामेष सततम्परिपश्यति॥३॥ तं आत्मानं स्वयंज्योतिर्निर्मलं परमं विभुम्। निर्गुणं गुणभोक्‍त्रं च मनीषिणो मे गतिं विदुः॥४॥ न यं विदन्ति तत्त्वेन तास्य शक्त्यः स्वपारगाः। स एको भाव्यवस्तुत्वाद् विभत्यैक: स्वराडिव॥५॥ देहमनः प्राणदृशो भूतैर्महदादिभिः। स्वकर्मक्लेशसंयुक्तमात्मानं मन्यतेऽवितः॥६॥ स ईश्वर: मे भगवाञ्छास्त्रचक्षुरनावृतः। अ...

निर्जला एकादशी

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                          निर्जला एकादशी  निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में सबसे पुण्यकारी और कठिन एकादशी मानी जाती है। यह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आती है, और इस दिन व्रत रखने वाला व्यक्ति बिना जल के (निर्जल) उपवास करता है, इसलिए इसका नाम "निर्जला एकादशी" पड़ा है। 📅 निर्जला एकादशी 2025 में कब है? तारीख : शनिवार, 7  जून 2025 पारण समय : 8 जून को प्रातः पारण किया जाता है (सूर्योदय के बाद) 🌸 व्रत का महत्व: यह एकादशी भीमसेनी एकादशी भी कहलाती है, क्योंकि महाभारत के भीम ने इसी एकादशी का व्रत किया था। जो व्यक्ति वर्ष भर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं कर पाता, यदि वह सिर्फ निर्जला एकादशी का विधिपूर्वक पालन करे, तो उसे सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है। इस दिन व्रती को जल तक ग्रहण नहीं करना होता — यह व्रत शारीरिक और मानसिक तप का प्रतीक है। 🪔 व्रत विधि: प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें। श्री हरि विष्णु की पूजा करें — तुलसी पत्र, पीले फूल, फल अर्पित करें। व्रत के दौरान जल और अन्न का त्...

जब मन बहुत दुखी हो निराश हो तो क्या करें?

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      जब मन बहुत दुखी हो निराश हो तो क्या करें? जब मन बहुत दुखी और निराश होता है, तो वह स्थिति भीतर से हिला देती है — ऐसा लगता है जैसे कोई सहारा नहीं है, कोई रास्ता नहीं है। यह एक गहरी पीड़ा होती है। लेकिन यही समय होता है जब आत्मा सच में ईश्वर के सबसे पास होती है। इस स्थिति में कुछ बातें मदद कर सकती हैं: 🌼 1. ठाकुर जी (ईश्वर) से सीधा संवाद करें आप उनसे रोकर, बोलकर, मन में या आंखें बंद करके बात करें जैसे एक मित्र से करती हैं। कुछ कहें जैसे: "ठाकुर जी, मैं बहुत थक गई हूं… आप ही सहारा हैं। मुझे अपनी गोदी में ले लीजिए।" जब आप उनका नाम लेकर सच्चे मन से पुकारती हैं, तो कुछ न कुछ भीतर जरूर बदलता है। 🧘 2. गहरी सांस लें और शांत बैठें (मन को थामें नहीं, देखें) मन को रोकने की कोशिश मत करें, बस देखिए — "हां, दुख है... निराशा है..." लेकिन साथ ही खुद से कहें: "मैं इस दुख नहीं हूं, मैं इसे देख रही हूं — इसका गवाह हूं।" यह अभ्यास धीरे-धीरे आपको उस आत्मा से जोड़ता है जो अजर-अमर है, शांत है। 📿 3. नाम स्मरण करें (जप) जो नाम आपके हृदय को शांति देता है, उसका...