भगवत भक्ति
भगवद्भक्ति परमार्थ के पत्र पुष्प ) भक्ति की महिमा का वर्णन करते हुए श्री कृष्ण ने उद्धव से कहा -जो साधक भक्त हैं अभी सिद्ध नहीं हुए हैं,अपनी ईन्द्रियों को जीतकर अपने वश में नहीं कर सके हैं , उसे संसार के विषय , काम , क्रोध बाधा पहुँचातI हैं। वह साधक अपने आप को इन सबसे अलग करता हैं , क्षण क्षण नाम जप , संकीर्तन अभ्यास करता हैं। भक्ति के प्रताप से वह भक्त इन विषयों के वश में नहीं होता हैं , विषयों से कभी हारता नहीं हैं। भगवान ...