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पान वाले चूने से होते हैं हमारे शरीर को बहुत से फायदे----

                           चूने से होने वाले फायदे  जब भी किसी को पीलिया हो जाए,  उसके सबसे अच्छी दवा है चुना। गेहूं के दाने के बराबर चूना ले लीजिए। गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से पीलिया में आराम मिल जाता है।  गेहूं के दाने के बराबर चूना लीजिए, उसे दही में मिलाकर या दाल में मिलाकर, नहीं तो पानी के साथ मिला कर ले लीजिए शरीर में होने वाली कैल्शियम की कमी को दूर करता है। 50 की उम्र के बाद जिनको कैल्शियम की कमी हो जाती है, उन्हें गेंहू के दाने के बराबर  पानी में लेने से, कैल्शियम की कमी दूर हो जाती है ।जोड़ों का दर्द ठीक हो जाता है, और मासिक धर्म रुकने के बाद होने वाली सभी तरह की की परेशानियों से आराम मिल जाता है।एनीमिया की प्रॉब्लम हो तो चूने से आराम मिलता है।  कई बार हमारी रीढ़ की हड्डियों में gape  पाया जाता है, वह भी चूने से आराम मिलता है। अनार के रस में गेहूं के दाने के बराबर चूना मिलाकर पीने से खून बहुत ज्यादा बढ़ता है। घुटने में घिसाव आ जाता है, उसके लिए भी चुना बहुत लाभकारी है...

आप अकेले नहीं आपके आसपास कोई है जो कह रहा है मैं हूं ना और वह है हम सबके प्रभु

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                                  मैं हूं ना यह शब्द देखने में तो छोटे हैं ,लेकिन जब कोई अकेला और उदास होता है।तो इन शब्दों के मायने बढ़ जाते हैं। जब हम छोटे होते हैं और हमें किसी खिलौने की तलाश होती है, तो मां और पिता नजर आते हैं,, जो कह रहे होते हैं मैं हूं ना ।जब हमें एग्जाम में नोट्स की या स्टडी की जरूरत होती है ,तो दोस्त होते हैं करीबी ,जो कहते हैं मैं हूं ना। जब हमें जीवन में आगे बढ़ना होता है चाहे वह पढ़ाई का क्षेत्र हो, चाहे वह जॉब्स या व्यापार का, उस समय पिता सामने होते हैं ,जो कह रहे होते हैं- मैं हूं ना ।चिंता क्यों करते हो/ या करती हो। ऐसे ही जब हम बड़े हो जाते हैं तो माता-पिता साथ नहीं होते हैं, वह हमें छोड़कर जा चुके होते हैं । तो केवल और केवल एक ईश्वर का साथ ही होता है, जो हमें अकेले होने पर वह हमारा साथ देता है। उस पर अगर आपका विश्वास हो, और श्रद्धा हो,, तो ईश्वर हर मोड़ पर, हर जगह यही अहसास दिलाता है कि ,तू अकेला नहीं है मैं हूं ना। तो विश्वास को बनाकर रखिए। ईश्वर से जुड़े रहिए। तो...

क्या आप जल्दी ही सभी दुखों से मुक्ति चाहते हैं तो श्री रामायण मनका 108 का हफ्ते में एक बार पाठ जरूर करें।

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     जिनके पास पूरी रामायण पढ़ने का समय नहीं है, वह यह रामायण मनका पढ़कर लाभ उठा सकते हैं।                                                       श्री रामायण मनका 108 रघुपति राघव राजाराम। पतित पावन सीताराम।। जय रघुनंदन जय घनश्याम। पतित पावन सीताराम।। भीड़ पड़ी जब भक्त पुकारे। दूर करो प्रभु दुख हमारे।। दशरथ के घर जन्मे राम। पतित पावन सीताराम।। विश्वामित्र मुनीश्वर आये। दशरथ भूप से वचन सुनाए।। संग में भेजें लक्ष्मण राम। पतित पावन सीताराम।। वन में जाए ताड़का मारी। चरण छू आए अहिल्या तारी।। ऋषियों के दुख हरते राम। पतित पावन सीताराम। जनकपुरी रघुनंदन आए। नगर निवासी दर्शन पाए।। सीता के मन भाए राम। पतित पावन सीताराम।। रघुनंदन ने धनुष चढ़ाया। सब राजों का मान घटाया।। सीता ने वर पाए राम। पतित पावन सीताराम।। परशुराम क्रोधित हो आए। दुष्ट भूप में मन में हरषायें।। जनक राय ने किया प्रणाम। पतित पावन सीताराम।। बोले लखन सुनो मुनि ज्ञानी...

गुरु गीता से लाभ

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                            गुरु गीता से लाभ   जब हम गुरु गीता का पाठ करते हैं तो बस हम उसे पढ़ ही नहीं रहे होते बल्कि हम अपने अंतर में श्री गुरु की पूजा कर रहे होते हैं। गुरु गीता, गुरु की चैतन्य मंत्र- देह है। गुरु गीता के प्रत्येक अक्षर में श्री गुरु का वास है। हम गुरु पूजा ही कर रहे होते हैं।  स्वामी मुक्तानंद

स्वंय शास्त्रों का व ग्रंथों का अध्ययन करने से क्या लाभ होता है?

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              स्वाध्याय का अर्थ श्री गुरु के शब्दों में जब तुम शास्त्रों का पाठ करते हो या सिद्ध जनों द्वारा रचित ग्रंथ पढ़ते हो  , तो तुम सकारात्मक ऊर्जा का एक भंडार बना लेते हो । तुम एक अत्यंत उत्थान कारी वातावरण का निर्माण कर लेते हो । तुम अपने अस्तित्व की समस्त कोशिकाओं को शुद्ध कर लेते हो। पवित्र ग्रंथों का नित्य पाठ करना, पवित्र नदियों में स्नान करने जैसा है। यह मन को तरोताजा करता है, वाणी को निर्मल कर देता है और तुम्हें शक्ति से भर देता है।    - गुरुमाई चिद्विलासानंद

मंत्रधुन का महत्व

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                                 मंत्रधुन जब तुम बहुत समय तक निरंतर मंत्र धुन गाते हो तो तुम मंत्र की अग्नि को उत्पन्न कर रहे हो, जो तुम्हारी संपूर्ण सत्ता में फैल जाती है।  - गुरुमाई चिद्विलासान्नद इसलिए जब कभी कुछ विपदा हो, कुछ संकट हो, मन निराश हो ,चारों ओर निराशा ही निराशा नजर आ रही हो। तो जो भी मंत्र आपको पसंद है ।जिस मंत्र से भी आपके मन को शांति मिलती है। उस मंत्र को आप जरूर सुनिए, घर में ऑडियो क्लिप के द्वारा या वीडियो के द्वारा घर में चला दीजिए। जब आपके घर में वह मंत्र प्रतिदिन चलता रहेगा ,तो आप महसूस करेंगे ,धीरे-धीरे आपके मन में और आपके घर में और आपके जीवन में शांति आ रही है। एक बार करके जरुर देखिएगा। मंत्र जब घर में चलता है ,तो आपके दिमाग में जो नकारात्मक सोच होती है, और जो आपके जीवन में, आपके विचार में नकारात्मक सोच होती है। वह धीरे-धीरे खत्म हो जाती है और आपके अंदर विश्वास पैदा हो जाता है और यही विश्वास आपको हर संकट में लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। राम राम

मनन के लिए श्री गुरु के शब्द

                       मनन के लिए श्री गुरु के शब्द सेवा का अर्थ है ,बिना किसी अपेक्षा या शर्त के अपना समय और अपनी शक्ति अर्पित करना और इस तरह से,पूर्ण स्वतंत्रता के साथ काम कर पाना। सेवा का अर्थ है ,उच्चतम उद्देश्य के लिए कार्य करना, दूसरे मनुष्य की योग्यता को पहचानते हुए कार्य करना और जीवन के मूल्यों को ध्यान में रखना। सेवा का अर्थ है ,कार्य को ऐसे करना जैसे पूजा का एक रूप हो ,भगवान की महिमा गाने का एक तरीका हो, परमोच्च प्रेम के लिए किया गया एक अर्पण हो । गुरु माई चिद्विलासानन्द

श्री राधा माधव के यवन भक्त श्री सनम साहब

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        श्री राधा माधव के यवन भक्त श्री सनम साहब भक्त  श्री सनम साहब जी का पूरा नाम था- मोहम्मद याकूब साहब। आपका जन्म सन् 1883 ईस्वी के लगभग अलवर में हुआ था। इनके पिता अजमेर के सरकारी अस्पताल के प्रधान चिकित्सक थे। इनकी मां एक पठान की पुत्री थी, फिर भी पूर्व जन्म के संस्कार वश उन्हें गोस्वामी श्री तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस पढ़ने और गाने का शौक था। श्री राम जी की कृपा से उन्हें श्री रामचरितमानस के मूल ग्रंथ वाल्मीकि रामायण को पढ़ने की इच्छा हुई। किंतु पर्दे में रहने के कारण बाहर जाना नहीं हो सका। तो उन्होंने एक पंडित जी को घर बुलवाकर रामायण सुनने की इच्छा व्यक्त की। किंतु उसमें भी सफलता नहीं मिली । तब मां ने कहा- 'बेटे ,तुम संस्कृत पढ़ लो ।"पर कोई पंडित गोमांस तथा प्याज खाने वाले मुसलमान को संस्कृत पढ़ाने के लिए तैयार नहीं हुआ। माता पुत्र  ने निश्चय पूर्वक मांस आदि का त्याग कर दिया। फिर मां के कहने पर सनम साहब ने पंडित गंगा सहाय शर्मा से सारी बात बताई और उनकी अनुमति मिलने पर पंडित जी से संस्कृत पढी। भागवत आदि ग्रंथों के अध्ययन के पश्चात उनका चित...

श्री कृष्ण दीवाने रसखान जी

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                   श्री कृष्ण दीवाने रसखान जी  हमारे बांके बिहारी कोई -ना -कोई  अहेतु की लीला करते ही रहते हैं। उनकी माया का कोई पार नहीं पा सकता, ना जाने कब किस पर रीझ जायँ, ना जाने कब किस जीव पर कृपा हो जाए। बुलाने पर तो वह कभी आते नहीं ,चाहे सिर पटक पटक कर मर जाए। ना तप से मिलते हैं, ना जप से, न ध्यान से ।यदि इन्हें इस प्रकार मिलना हो तो योगी, यति, ऋषि, ध्यान करते रहते हैं, परंतु यह उनकी ओर देखते तक नहीं। जब कृपा करते हैं, तो अचानक करते हैं।  कृष्ण के दीवाने रसखान जी एक मुसलमान थे। एक बार की घटना है  वे अपने उस्ताद के साथ मक्का मदीना जा रहे थे। उनके उस्ताद ने कहा- देखो, रास्ते में हिंदुओं का तीर्थ वृंदावन आएगा ,वहां एक काला नाग रहता है। तू आगे- पीछे मत देखना ,नहीं तो वह तुझे डस लेगा, तू मेरे पीछे-पीछे चला आ।अपने दाएं- बाएं भी मत देखना, वरना जब मौका दिखेगा तुझेडँस लेगा।  बस रसखान जी के मन में एक उत्कंठा सी जाग गई ,क्या मुझे वहां काला नाग दिखाई देगा। वह यही सोचते जा रहे थे उनके लो लग गई, हमारी श्री बांके ब...