संदेश

2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आज का शुभ विचार

चित्र
                                                                          आज का शुभ विचार ईश्वर के संबंध में अनुभव उन्ही को होते हैं जो लोग सत्य , दया , क्षमा , अहिंसा , आदि सदगुणो  को धारण कर के संयमित जीवन बिताते हैं।      

परमार्थ क पत्र - पुष्प भाग 1

चित्र
                                                                                                 ( परमार्थ के पत्र - पुष्प) हम सब एक ही ईश्वर की संतान हैं। हमारे गुरुदेव पुज्य श्री मलूक पीठाधीश्वर  परम पूज्य श्री राजेन्द्र दासजी महाराज जी ने हमें एक पुस्तक दी, जिसमे हमारे दादा गुरु    श्री भक्ततमाली जी द्वारा  सत्संग  के कुछ   अंश  हैं जो मैं आपके समक्ष रख रही हूँ। जिसके द्वारा हमे जीवन में कई महत्व पूर्ण सन्देश मिलेंगे। हमारे दादा गुरु कहते हैं कि भारतीय जनता कर्म भूमि में जन्म पाकर धन्य- धन्य हो जाती हैं। हम लोग जंक्शन पर खड़े  हैं। सब और को जाने वाली गाड़ियाँ खड़ी हैं (ब्रह्म लोक , विष्णु लोक, साकेत वैकुण्ठ ,  रमावैकुंठ , गोलोक,शिवलोक , पितृलोक , नरक भी हैं। )जहाँ जाना चाहो  वहाँ ...

आज का शुभ विचार

चित्र
         यदि आप हिम्मत का पहला कदम आगे बढ़ाएंगे , तो परमात्मा की सम्पूर्ण मदद मिल जायेगी।

आज का शुभ विचार

चित्र
                                                                                    आज का शुभ विचार प रमात्मा गुणों के सागर हैं । यदि आप किसी विकार की अग्नि में जल रहे हैं ,तो उस  सागर में डुबकी लगाइये ।                                                                            ।।         ॐ गणपतये नमः ।।

शुभ नहीं अशुभ कार्यों को टालते रहो

चित्र
संस्कृत में एक सुक्ति हैं कि 'शुभस्य शीघ्रम् ,अशुभस्य  कलहरणम 'अथार्त्त  शुभ कार्य को जितना जल्दी हो सके कर डाले , लकिन अशुभ कार्य  को टालते रहे ।यदि हम तत्क्षण किसी की मदद करने के लिए आगे आ जाते हैं तो उसकी मदद हो जाती हैं और एक नेक काम भी ,लकिन वह क्षण बीत गया तो सम्भव हैं हम उस अच्छे कार्य को करने के लिए जीवित ही न रहे अथवा हमारे विचार ही बदल जाये।बहुत सारी बातें हो सकती हैं ,लकिन इतना निश्चित हैं कि यदि हम उस क्षण को चूक गए तो हम किसी नेक काम करने से वंचित रह जायेगे।हमने अपने जीवन में कई बार यह महसूस किया होगा की अक्सर अच्छे कार्य को करने का हम अवसर चूक जातें हैं।तो ठीक ही कहा हैं कि शुभस्य शीघ्रम् अथार्त् शुभ कार्य अथवा अच्छे कार्य को शीघ्र कर लेना चाहिए । अशुभस्य  कालहरणम् अथार्त्  अशुभ अथवा पाप कर्म के लिए शीघ्रता न करें ।अपितु समय निकल जाने दे ।सम्भव  हैं कालान्तर में कहीं से सदबुद्धि मिल जाये  और हम पाप कर्म करने से बच जाएँ ।आज इस विश्व में ऐसे अणु परमाणु बम मौजूद हैंकि  पूरी धरती नष्ट हो जाये पर कुछ लोगो की सदबुद्धि  की वजह से ...

व्यक्ति के व्यक्तित्व के प्रकार (type of personailty )

चित्र
     व्यक्ति में 6 प्रकार का व्यक्तित्व होता हैं । व्यक्तित्व षड्मुखी होता हैँ -अथार्त व्यक्ति की विचार धारा ६ प्रकार की होती हैं - १ -शास्त्रमुखी -जिस के अंतर्गत व्यक्ति शास्त्र के अनुसार ही कार्य करता हैं वह यह ध्यान रखता हैं कि शास्त्र में क्या उचित हैं ,क्या अनुचित। २ -गुरु मुखी-व्यक्ति गुरु के आधार पर ही कार्य करता हैं ।जो गुरु ने कह दिया उसी आज्ञा का पालन करता हैं। ३ -राजमुखी -इसमें व्यक्ति वाही कार्य करता हैं जो राजा कहे अथवा सत्ता कहे ।जिससे राजा खुश रहे। ४ -स्वमुखी -व्यक्ति अपनी चेतना से कार्य करता हैं।जो चेतना गुरु ने जगा दी ,उसी के अनुसार गुरु व शास्त्र को ध्यान में रखकर कार्य करता हैं । ५ -मनमुखी -जो मन में आयेगा वही कार्य करेगा ।वह न गुरु की परवाह करता हैं न शास्त्र की।जो उसकी मर्जी होती हैं वही कार्य करता हैं। ६ -गोमुखी -व्यक्ति हमेशा स्मरण करता रहता हैं और कार्य  करता रहता हैं।निरन्तर स्मरणशील रहता हैं।                             जय श्री राधे !

आज का शुभ विचार

चित्र
                                                आज का शुभ विचार                                   भागवत कथा सुनने से चार लाभ होते हैं - १-तृप्ति ,अथार्त् कुछ और न पाने की लालसा ।  २ -अपने प्रभु से प्रेम  । ३ -निष्काम भावना  । ४ -भक्त प्रेम अथार्त् जितने भी प्रभु भक्त हैं उन सबसे विशेष प्रेम ।

आज का शुभ विचार

चित्र
आदमी के मन को तीन चीजें कमज़ोर कर देती हैं- 1-व्यर्थ के वाद -विवाद 2-ग़लत राह पर चलना 3-ग़लत स्मृति (व्यर्थ की बातों को याद करना ।

आज का शुभ विचार

चित्र
संत ,सदगुरु गण्डकी नदी की तरह होते हैं ,जिसमे पड़ा हुआ तेड़े से तेड़ा पत्थर भी घिस घिसकर शालिग्राम हो जाता हैं और पूजनीय बन जात

जीवन में सफलता के सुत्र (भाग 2)

चित्र
                                                        जीवन में सफलता के सूत्र  7. आध्यात्मिक बनिए - विलासिता भरा जीवन हमारे आध्यात्मिक मार्ग में बाधा उत्पन्न करता हैं ।इसलिए विलासिता से बचना चाहिए ।भौतिक पदार्थ कुछ समय के लिए होते हैं ,और यह हमे ज्यादा लम्बे समय तक सुख नहीं दे सकते ।किन्तु आध्यात्मिक उपलब्धियाँ स्थायी होती हैं ,जो हमेशा हमारे साथ रहती हैं ।तथा जीवन को आनन्द देती हैं ,सच्चा आनन्द । 8.आत्मनियंत्रित करिये - आत्मनियन्त्रण के द्वारा मनुष्य ऊंचाइयों के शिखर तक पहुँच सकता हैं ।प्रत्येक व्यक्ति में बहुत कुछ कर सकने की क्षमता होती हैं।उसकी उन्नति का सबसे बड़ा रहस्य हैं आत्मनियन्त्रण ।इसलिए जिस व्यक्ति ने आत्मनियन्त्रण कर लिया ,उसे अवश्य सफलता मिलती हैं ।जो व्यक्ति आत्मनियन्त्रण कर लेता हैं वही क्रोध पर नियंत्रण कर लेता हैं और क्रोध पर नियंत्रण मतलब हर क्षेत्र में तरक्की । 9. आत्मनिरीक्षण करिये- आत्मनिरीक्ष...

आज का शुभ विचार

चित्र
जो हम अभी अनुभव कर रहे हैं ,वह अतीत का फल हैं ,भविष्य में जो अनुभव करेंगे वो इस बात पर निर्भर करता हैं कि हम अभी क्या करते हैं ।

जीवन में सफलता के सूत्र (भाग 1)

चित्र
जीवन में सफलता के सूत्र  1 . जीवन का उद्देश्य निर्धारित करें - उद्दे श्य के बिना व्यक्ति  के  जीवन का कोई  महत्व नहीं रखता ।मनुष्य का जीवन यूँ ही जीने के लिए नहीं हुआ हैं, यह तो कुछ करने के लिए हुआ हैं  ,जिससे उसका स्मरण मरने के बाद भी लोग कर सकें ।जीवन का उद्देश्य निश्चित करके उसको पूरा करने के लिए सावधानी पूर्वक कार्य करना चाहिए । 2 . नित्य प्रभु -स्मरण करें - प्रतिदिन प्रार्थना , स्तुति ,प्रभु के ध्यान के लिए कुछ समय अवश्य दें ।प्रतिदिन कार्य आरम्भ करने से पूर्व माता -पिता ,गुरु को अवश्य प्रणाम करें ;क्योंकि प्रभु की कृपा और माता -पिता के आशीर्वाद  के बिना सफलता सम्भव नहीं हैं । 3. अपने काम को श्रेष्ठ मानें - अक्सर ऐसा होता हैं जो जिस काम में हैं ,  वो उस काम में खुश नहीं होता ।नौकरी वाले को व्यवसाय और व्यवसाय वाले को नौकरी में अधिक लाभ दिखाई देता हैं ।नौकरी वाले  जीवन पराधीन लगता लगता हैं ।व्यापार  वाले को व्यापार में हर समय घाटे   की चिंता बनी रहती हैं । किसान को खेती में मेहनत अधिक और आय कम ...

आज का शुभ विचार

चित्र
यदि आप बहुत अधिक लोगों पर निर्भर रहते हैं तो इससे आपको निराश होने के अवसर बढ़ जाते हैं ।

आज का शुभ विचार

चित्र
                        ।।   श्री कृष्णा  ।। हम सभी को समस्याओ का सामना करना पड़ता हैं ,परन्तु महत्वपूर्ण बात यह हैं कि हम इसका सामना किस ढंग से करते हैं । 

जीवन में मिठास

.                              मिठास              〰〰〰〰         चाय का कप लेकर आप         खिड़की के पास बैठे हों     और बाहर के सुंदर नज़ारे का आनंद लेते हुए चाय की चुस्की लेते हैं .....अरे चीनी डालना तो भूल ही गये..;   और तभी फिर से किचन मेँ जाकर    चीनी डालने का आलस आ गया....     आज फीकी चाय को जैसे तैसे       पी गए,कप खाली कर दिया      तभी आपकी नज़र कप के तल       में पड़ी बिना घुली चीनी पर                 पडती है..!!   मुख पर मुस्कुराहट लिए सोच में पड     गये...चम्मच होता तो मिला लेता    हमारे जीवन मे भी कुछ ...

आज का शुभ विचार

चित्र
अगर अँधेरे से बहुत डर लगता हैं तो अपनी आँखे बंद कर लेना कोई समझ दारी नहीं हैं ।

 भागवत धर्म केसे अपनाये

चित्र
                         भागवत धर्म को अपनाने के लिए क्या करे ! जहाँ -जहाँ भगवान ने भगवत प्राप्ति के लिए अपने श्री मुख से जो भी उपाय बताये हैं ,उन्ही का नाम हैं भागवत धर्म । भागवत धर्म माने भगवान की भक्ति ।ये ऐसा सरल मार्ग हैं कि  इस पर कमजोर से कमजोर ,अनपढ़ से अनपढ़  आदमी आँख मुंद कर चल पड़ेगा तो गिरेगा नहीं और वो रास्ता भी नहीं भूलेगा ।वो भटकने वाला नहीं हैं ।गो स्वामीजी कहते हैं - तुलसी सीताराम भजु दृढ़ राखहु विश्वास । कबहुं  बिगड़त न सुने श्री रामचन्द्र के दास ।। इसमें कुछ विशेष नहीं करना पड़ता ।जो कुछ आप करते रहे हो वो सब आप कर सकते हो ।खाना -पीना ,बाल -बच्चे ,घर ,मकान । लेकिन यह समझ करके कि यह प्रभु का काम हैं और प्रभु के लिए हैं ।मैं जो कुछ कर रहा हूँ अपने प्रभु के लिए कर रहा हूँ ।उनकी प्रसन्नता के लिए कर रहा हूँ । भगवान के अतिरिक्त कही भी मन इधर -उधर ले जाएगा ,भटकायेगा तो उसे भय होगा ,गिरने का डर रहेगा ।भगवान की भक्ति करने वाला ,भगवत धर्म का पालन करने वाला प्रभु के नाम ,रूप ,गुण ,ल...

जीवन में परम कल्याण कैसे हो ?

चित्र
  जीवन में परम कल्याण कैसे       हो ? एक बार श्री कबीरजी  रोने लगे और उनके पुत्र श्री कमालजी  हंसने लग गए ।कबीर जी ने पूछा -बेटा तू हँस क्यों रहा हैं ? कमालजी  बोले -पिताजी ! पहले आप बताइए  कि  आप रो क्यों रहे हैं ? कबीर जी बोले -   चलती चक्की देख के दिया कबीरा रोय । दो पाटन  के बीच में ,साबुत बचा न कोय।। एक चक्की चल रही  हैं ,और इसमें जो भी पड़ा वो पिस  गया ,यही देख कर रोना आया ।कमाल बोलें -   (वही)    चलती चक्की देख कर हँसा  कमाल ठठाय ।  कील सहारे जो रहे ,सो कैसे पिस  जाए ।। चक्की के दो पाट  होते हैं और ऊपर  वाला पाट  उठाकर  देखे तो बीच वाली  मोटी     कील के चार- छः अंगुल इर्द -गिर्द वाला अनाज सुरक्षित रहता हैं ।इन दोनों का भाव गोस्वामी श्री तुलसीदास जी ने एक दोहे में बताया -   माया चक्की कीलहरि,जीव चराचर नाज।  तुलसी जो उबरो चहे ,कील  शरण को भाज ।। माया की चक्की हैं ।माया की चक्की रूपी दो पा...

महाभारत की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां

चित्र
                  महाभारत की महत्वपूर्ण जानकारियां                पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं - 1. युधिष्ठिर 2. भीम 3. अर्जुन 4. नकुल। 5. सहदेव ( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है ) यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी । वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र….. कौरव कहलाए जिनके नाम हैं - 1. दुर्योधन 2. दुःशासन 3. दुःसह 4. दुःशल 5. जलसंघ 6. सम 7. सह 8. विंद 9. अनुविंद 10. दुर्धर्ष 11. सुबाहु। 12. दुषप्रधर्षण 13. दुर्मर्षण। 14. दुर्मुख 15. दुष्कर्ण 16. विकर्ण 17. शल 18. सत्वान 19. सुलोचन 20. चित्र 21. उपचित्र 22. चित्राक्ष 23. चारुचित्र 24. शरासन 25. दुर्मद। 26. दुर्विगाह 27. विवित्सु 28. विकटानन्द 29. ऊर्णनाभ 30. सुनाभ 31. न...
चित्र
                           मन में दो विचार क्यों आते हैं और किसकी सुने ? अक्सर आपने देखा होगा कि हमारे मन में दो तरह के विचार आते हैं ,एक नकारात्मक और एक सकारात्मक ,हम इस दुविधा में रहते हैं कि किसकी सुने या फिर यह दो तरह के क्यों विचार आ रहे हैं ।मेने कही सुना था कि हम सभी के मन में दो तरह के विचार रमण करते हैं ,यह हम पर निर्भर करता हैं कि हम किसको परोषित करते हैं ,या किसको अधिक  महत्व देते हैं ।यदि आप दुविचारो को अधिक महत्व देने लगोगे तो इस तरह कि विचारधारा आप पर हावी होने लगेगी व् आपके अंदर की सुविचार धारा धीरे -धीरे अपना दम तोड़ देगी और मृत हो जाएगी ।यह कही हद तक इस बात पर निर्भर करता हैं कि हमने किसी संत या सदगुरू का आश्रय लिया हैं या नहीं।हम जितना अपने ईश्वर के नजदीक होते जाएंगे या सदगुरू के सानिध्य में आ जाएगे हमारी विचारधारा उतनी ही सकारात्मक होती चली जाएगी ।हमारे मन में कितने ही नकारात्मक विचार आ जाए वह हम पर हावी नही हो सकते ।हमारे ईश्वर के प्रति आस्था जेसे जेसे बढ़ती जाएगी ,हमारी सोच उतनी ही सकार...

gopi chadan

चित्र
गोपी चंदन क्या है ? गोपी तिलक क्यो लगाया जाता है ? कौनसे भक्त गोपी तिलक करते है? यु तो हम सभी ने देखा है कि सभी भक्त अपने माथे पर अलग अलग प्रकार के तिलक करते है| कोई लाल तिलक करता है तो कोई मिट्टी के रंग का तिलक करता है |और उनका लगाने का प्रकार भी सभी परम्पराओं मे भिन्न भिन्न प्रकार का होता है| जो भक्त भगवान श्री कृृष्ण को मानते है और वैष्णव सनातन धर्म पर चलते है | वे भक्त सदैव अपने मस्तक पर गोपीचंदन के तिलक का उपयोग करते है| गोपी तिलक क्यो किया जाता है ? एक तो अगर हम संसारिक दृष्टिकोण से देखेगे तो ,उसे हम ऐसे देख सकते है, कि जिस प्रकार हर देश का अपनी अपनी एक पहचान होती है, अर्थात उनके झंडे के रुप में| जैसे हम अगर किसी क झंडा दिखायेगे तो सामने वाला व्यक्ति समझ जायेगा कि हम भारत से है| ऐसे ही जब कोई भक्त वैष्णव परम्परा ग्रहण करता है तो गोपी तिलक करता है | या दुसरे उदारण से हम इसे ऐसे समझ सकते है , कि जैसे हर एक स्कुल की अपनी एक अलग युनिर्फाम होती है | जिसे हमे पता चलता है कि ये बच्चा किस स्कुल का है| बस इसी प्रकार गोपीचंदन का तिलक भी...

देवराहा बाबा के अमृत वचन सेवा,सहानुभूति और उदारता

चित्र
   देवराहा बाबा के अमृत वचन सेवा,सहानुभूति और उदारता                            (ब्रह्मलीन योगिराज श्रीदेवराहा बाबाजी के अमृत वचन )         प्रेम ही सृष्टि हैं , सबके प्रति प्रेम भाव रखो।                 भूखो को रोटी देने में और दुखियों के आसूं पोछने में जितना पुण्य लाभ होता हैं और , उतना वर्षो के जप तप भी नहीं होता।         परमात्मा  पृथक कुछ भी नहीं हैं। यह सर्व्यापक ईश्वर प्रकृति के कण -कण  व्याप्त हैं। अतः चराचर को भगवत स्वरूप मानकर सबकी सेवा करो।         गीता का सार हैं , दुखी को सांत्वना तथा कष्ट में सहायता देना एवं उन्हें दुःख भय  से मुक्त करना।          आत्मचिंतन , दैन्य -भाव और सदगुरु  की सेवा इन तीनो बातों को कभी मत भूलो।         प्रतिदिन  यथासाध्य कुछ- न -कुछ दान अवश्य करों ,इससे त्याग की प्रवृ...

राम रक्षा स्तोत्र हिदी में

चित्र
         प्रभु हमारी हर संकट से रक्षा करें एक मात्र केवल और केवल उन्ही का सहारा हैं                        राम रक्षा स्तोत्र हिदी में                                  आज मैं आप सबके सामने एक ऐसे स्तोत्र के रखना चाहती हूँ, जिसके महत्व की जानकारी  मेने जाने कितनी बार विभिन्न पत्रिकाओ में एवं ,गुरु जी के .श्री मुख से सुनी हैं। बहुत से लोगो ने अपने साथ होने वाले आश्चर्यजनक अनुभव के बारे में भी बताया हैं जो कि बिलकुल सत्य थी। बल्कि मैंने स्वंय महसूस किया  कि अगर इस  पाठ को पूरी निष्ठा के साथ किया जाए  तो यह चमत्कार दिखलाता हैं। किसी को भी जब कोई समस्या का समाधान न मिल रहा हो तो एक बार जरूर विश्वास के साथ इस पाठ  को करें, अवश्य ही लाभ होगा।  यह मैं हिंदी में ही करने की सलाह दूँगी , ताकि कोई गलती न हो। पाठ इस  प्रकार हैं -              ...

हम अपने बने।

चित्र
                                                        अपने बने                                         दुखी व्यक्ति के लिए वास्तव में यह संसार दुःख का जंगल हैं। दुःख  से घिरे  हुए व्यक्ति के अंदर केवल एक ही विचार कार्य करता हैं कि  वह अकेला हैं और सब और से घृणा से भरा हैं। उसे ऐसा लगता हैं कि  कोई भी व्यक्ति को उससे संवेदना नहीं हैं और न ही उसके प्रति कोई आकृष्ट नहीं हैं। और तो और उसका स्वंय पर से भी विश्वास उठ जाता हैं। पर उसके मन से यह बात अलग नहीं होती कि शायद किसी अन्य के द्वारा उसे दुःख से छुट्टी मिल जाए।               दुःख के समय मन से किसी प्रकार की सहायता नही मिलती ;क्योंकि उसकी अनर्गल  इच्छाएisही दुःख उत्पन्न करती हैं.इच्छाओ से उत्पन्न सुख को तो वह गले लगा ...