पवित्र जीवन जीने के साधन कौन-कौन से हैं
पवित्र जीवन का जीने की कला विचारो की पवित्रता - मालिक तेरी रजा रहे और तू ही तू रहे बाकी न मैं रहूँ न मेरी आरजू रहे। जब तक कि तन में जान रंगों में लहू रहे , तेरा ही जिक्र हो और तेरी जुस्तजू रहे।। हमारा कर्तव्य है कि हम प्रत्येक कार्य ...