चाहे मन लगे या न लगे, यदि भगवान्का नाम जीभसे निरन्तर लेने लग जाइयेगा
॥ श्री हरिः ॥ जीभ से निरन्तर भगवान् का नाम लीजिये — भगवान्ने कहा है—‘सभी धर्मोका आश्रय छोड़कर केवल एकमात्र मेरी शरणमें चले आओ। फिर मैं तुम्हें सब पापोंसे मुक्त कर दूँगा, तुम चिन्ता मत करो।' सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज । अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥ (गीता १८ । ६६ ) जरूर पढ़े– https://www.parmatmaaurjivan.co.in/2022/02/blog-post.html मनकी कैसी भी अवस्था क्यों न हो, कोई परवाह नहीं । केवल जीभसे निरन्तर भगवान्का नाम लीजिये, फिर सारी जिम्मेवारी भगवान् सँभाल लेंगे। केवल जीभसे नाम - स्मरण, और कोई शर्त नहीं । चाहे मन लगे या न लगे, यदि भगवान् का नाम जीभ से निरन्तर लेने लग जाइयेगा तो फिर न तो कोई शंका उठेगी, न कोई चाह रहेगी । थोड़े ही दिनों में शान्ति का अनुभव करने लगियेगा। इससे सरल उपाय कोई नहीं है । पूर्व के पापों के कारण नाम लेने की इच्छा नहीं होती । यदि एक बार हठसे निरन्तर नाम लेकर नियम लेकर ४-६ महीने बैठ जाय...