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सितंबर, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आज का शुभ विचार

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                        आज का शुभ विचार जीवन मे कैसा भी दुख और कष्ट आये पर भक्ति मत छोडिए। क्या कष्ट आता है तो आप भोजन करना छोड देते है। क्या बीमारी आती है तो आप सांस लेना छोड देते है, नही ना।        फिर जरा सी तकलीफ़ आने पर आप भक्ति करना क्यों छोड़ देते हो ? कभी भी दो चीज मत छोडिए भजन और भोजन।         भोजन छोड दोगे तो ज़िंदा नही रहोगे। भजन छोड दोगे तो कही के नही रहोगे सही मायने में भजन ही भोजन है। "दिल" कहता हैं की लिख दू ये जिन्दगी तेरे नाम की कृष्ण तुझे खुश ना कर पाऊ, तो ये ज़िन्दगी किस काम की "मेरे कृष्ण  जय श्री राधे

पितृपक्ष में श्राद्ध का महत्व क्यों है?

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         पितृपक्ष में श्राद्ध करने का विशेष महत्व क्यों है? हिंदू धर्म में व्यक्ति के कर्म और उसके पुनर्जन्म का विशेष संबंध देखा जाता है। यही वजह है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के उपरांत उसका श्राद्ध कर्म करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। ऐसी मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति के द्वारा उसके पूर्वजों का पूरे विधि-विधान से श्राद्ध अथवा तर्पण ना किया जाए तो उस जीव की आत्मा को मुक्ति प्राप्त नहीं होती और वह इस संसार में ही रह जाती है और अपने वंशजों से बार-बार यह उम्मीद रहती है कि वह उसके मुक्ति के मार्ग को खोलने के लिए श्राद्ध कर्म करें। यहां पर ध्यान देने योग्य बात यह है कि विशेष रूप से जौ और चावल में मेधा की प्रचुरता होने के कारण और ये दोनों ही सोम से संबंधित होने के कारण पितृ पक्ष में यदि इन्ही से पिंडदान किया जाए तो पितृ अपने 28 अंश रेतस को पाकर तृप्त हो जाते हैं और उन्हें प्रचुर शक्ति मिलती है और इसके बाद वे सोम लोक में ये रेतस के अंश देकर अपने लोक में चले जाते हैं। श्रद्धया इदं श्राद्धम्‌। अर्थात जो पूर्ण श्रद्धा के साथ किया जाये, वही श्राद्ध है। पितृ पक्ष ...

श्राद्ध में कुछ विशेष(आखिर क्या होता है व्यक्ति की मृत्यु के बाद?)

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        आखिर क्या होता है व्यक्ति की मृत्यु के बाद? पृथ्वी लोक पर जब किसी प्राणी की मृत्यु होती है और वह अपना शरीर त्यागता है तो वह 3 दिन के अंदर पितृ लोक पहुँचता है। इसलिए मृत्यु के तीसरे दिन तीजा मनाया जाने का विधान है। कुछ आत्माएं अधिक समय लेती हैं और लगभग 13 दिन में पितृ लोक पहुँचती हैं, उन्हीं की शांति के लिए तेरहवीं या त्रियोदशाकर्म किया जाता है। कुछ ऐसी भी आत्माएं होती हैं जिन्हें पितृ लोक पहुंचने में 37 से 40 दिन लग जाते हैं अर्थात लगभग सवा महीने में वो ये सफर तय करती है। इसलिए महीने भर के बाद मृत्यु की तिथि पर पुनः तर्पण किया जाता है और इसके पश्चात एक वर्ष (12 मास) के बाद तर्पण द्वारा बरसी की जाती है। इसके पश्चात उन्हें उनके कर्मानुसार पुनर्जन्म प्राप्त होने की संभावना होती है और उनका न्याय होता है। जिन लोगों ने सत्कर्म किया होता है और अच्छे कर्मों की संख्या अधिक होती है उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है अर्थात बार-बार जन्म लेने के बंधन से मुक्ति मिल जाती है। यजुर्वेद के अनुसार तप और ध्यान करने वाले सद्चरित्र प्राणी ब्रह्मलोक पहुँचकर ब्रह्मली...

मां का एक मंदिर जहां अखंड ज्योति से टपकता है कि केसर

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मां का एक मंदिर जहां अखंड ज्योति से टपकता है केसर भारत में वैसे तो बहुत से मंदिर हैं लेकिन उनमें से कुछ ही ऐसे हैं जो अपने चमत्कारों और रहस्यों की वजह से ख़ासा महत्वपूर्ण माने जाते हैं। धर्म के नाम पर होने वाले चमत्कारों को कई बार अंधविश्वास का नाम भी दिया जाता है, लेकिन विशेष रूप कुछ ऐसे भी मंदिर हैं जो वास्तव में अपने चमत्कारों की वजह से वैज्ञानिक तथ्यों को भी झूठा साबित कर देते हैं। आज हम आपको मुख्य रूप से माता के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहाँ चैबीसों घंटे अखंड ज्योत जलती है और उस ज्योत से केसर टपकता है। आइये जानते हैं कहाँ स्थित है ये चमत्कारी मंदिर और क्या है इसके पीछे का रहस्य। आई जी माता के मंदिर में ज्योति से केसर टपकता है आपको बता दें कि जहाँ आमतौर पर दीये से कालिक टपकती है वहीं राजस्थान के जोधपुर के निकट स्थित बिलाड़ा नाम के गांव में आई जी माता के मंदिर में अखंड ज्योत से केसर टपकता है। यहाँ आने वाले भक्तों का ऐसा मानना है इस ज्योत से निकलने वाले केसर को आँखों में डालने से आँख से संबंधित सभी बीमारियों से मुक्ति मिलती है। आई जी माता मुख्य रूप से राजस्था...

महामृत्युंजय मंत्र और लघु मृत्युंजय मंत्र के लाभ

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महामृत्युंजय मंत्र और लघु मृत्‍युंजय मंत्र के जप का लाभ महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद का एक श्लोक है.शिव को मृत्युंजय के रूप में समर्पित ये महान मंत्र ऋग्वेद में पाया जाता है.स्वयं या परिवार में किसी अन्य व्यक्ति के अस्वस्थ होने पर मेरे पास अक्सर बहुत से लोग इस मन्त्र की और इसके जप विधि की जानकारी प्राप्त करने के लिए आते हैं. इस महामंत्र के बारे में जहांतक मेरी जानकारी है,वो मैं पाठकों के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ. || महा मृत्‍युंजय मंत्र || >ॐ त्र्यम्बक यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धन्म। उर्वारुकमिव बन्धनामृत्येर्मुक्षीय मामृतात् !! ||संपुटयुक्त महा मृत्‍युंजय मंत्र || ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !! ||लघु मृत्‍युंजय मंत्र || ॐ जूं स माम् पालय पालय स: जूं ॐ। किसी दुसरे के लिए जप करना हो तो-ॐ जूं स (उस व्यक्ति का नाम जिसके लिए अनुष्ठान हो रहा हो) पालय पालय स: जूं ॐ || महा मृत्‍युंजय जप की विधि || महा मृत्युंजय मंत्र का पुरश्चरण सवा लाख है और लघु म...

बहुत मजबूत रिश्ता है मेरा और मेरे परमेश्वर का

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                  बहुत मजबूत रिश्ता है मेरा और मेरे परमेश्वर का एक सेठ के यहां नौकर काम करता था 1 दिन नौकर अनुपस्थित हो गया, तो सेठ ने सोचा इसकी तनख्वाह बढ़ा देता हूं तो यह रोज काम पर आने लगेगा । जब महीने की आखिरी तारीख को सेठ ने तनख्वाह बढ़ा कर दी ,तो उस व्यक्ति ने कुछ नहीं कहा चुपचाप तनख्वाह ले ली। कुछ टाइम बाद उसने फिर छुट्टी कर ली , तो सेठ को बहुत गुस्सा आया उसने सोचा कि इस पर कोई असर नहीं हुआ ,मैं इस की तनख्वाह बढ़ाई फिर भी इसने छुट्टी कर ली। तो उसने  सोचा ,मैं इसकी तनख्वाह कम कर देता हूं ।महीने के आखिरी तारीख को जब सेठ में तनख्वाह कम कर ,कर दी तो भी उस व्यक्ति ने चुपचाप ले ली, कुछ नहीं कहा तो सेठ को बहुत हैरानी हुई ,उसने उससे पूछा कि मैंने जब तुम तुम्हारी तनख्वाह बढ़ाई तब भी तुमने कुछ नहीं कहा और जब कम करदी, तब भी तुमने कुछ नहीं कहा तो नौकर बोला मैंने जब पहले छुट्टी ली थी तो मेरे घर मे बच्चे ने जन्म लिया था तो मैंने सोचा ईश्वर ने उसके भाग्य का पैसा मुझे दे दिया, और जब आप ने दूसरी बार मेरी तनख्वाह कम कर दी, उस समय मैंने जब छुट्...

श्री राधा के 32 प्रमुख नाम

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 श्री राधा जी के 32 प्रमुख नाम जिनका श्रवण करने से सभी दुख ~कष्ट दूर हो जाते हैं- मृदुल भाषणी राधा राधा  सौंदर्य राषिणी  राधा राधा  परम पुनीता राधा राधा  नित्य नवनीता राधा राधा  रास विलासिनी राधा राधा  दिव्य सुवासिनी राधा राधा  नवल किशोरी राधा राधा  अति ही भोरी राधा राधा  कंचन वर्णी राधा राधा  नित्य सुख कर्णी राधा राधा  सुभग भामिनी  राधा राधा  जगत स्वामिनी राधा राधा  कृष्ण आनंदनी राधा राधा  आनंद कन्दिनी राधा राधा  प्रेम मूर्ति राधा राधा  रस आपूर्ति राधा राधा  नवल बृजेश्वरी राधा राधा  नित्या रासेश्वरी राधा राधा  कोमल अंगनी राधा राधा  कृष्ण संगिनी राधा राधा  कृपा वर्षिनी राधा राधा  परम हर्षिनी राधा राधा  सिंधु स्वरूपा राधा राधा  परम अनूपा राधा राधा  परम हितकारी राधा राधा  कृष्ण सुख कारी राधा राधा  निकुंज स्वामिनी राधा राधा  नवल भामिनी राधा राधा  रास रासेश्वरी राधा राधा  स्वंय परमेश्वरी राधा राधा...

19 ऊँटो की कहानी हम पर आधारित हैं।

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                        *19 ऊंट की कहानी  एक गाँव में एक व्यक्ति के पास 19 ऊंट थे।एक दिन उस व्यक्ति की मृत्यु हो गयी।मृत्यु के पश्चात वसीयत पढ़ी गयी। जिसमें लिखा था कि: मेरे 19 ऊंटों में से आधे मेरे बेटे को,19 ऊंटों में से एक चौथाई मेरी बेटी को, और 19 ऊंटों में से पांचवाँ हिस्सा मेरे नौकर को दे दिए जाएँ। सब लोग चक्कर में पड़ गए कि ये बँटवारा कैसे हो ? 19 ऊंटों का आधा अर्थात एक ऊँट काटना पड़ेगा, फिर तो ऊँट ही मर जायेगा। चलो एक को काट दिया तो बचे 18 उनका एक चौथाई साढ़े चार- साढ़े चार. फिर? सब बड़ी उलझन में थे। फिर पड़ोस के गांव से एक बुद्धिमान व्यक्ति को बुलाया गया। वह बुद्धिमान व्यक्ति अपने ऊँट पर चढ़ कर आया, समस्या सुनी, थोडा दिमाग लगाया, फिर बोला इन 19 ऊंटों में मेरा भी ऊँट मिलाकर बाँट दो। सबने सोचा कि एक तो मरने वाला पागल था, जो ऐसी वसीयत कर के चला गया, और अब ये दूसरा पागल आ गया जो बोलता है कि उनमें मेरा भी ऊँट मिलाकर बाँट दो। फिर भी सब ने सोचा बात मान लेने में क्या हर्ज है। 19+1=20 हुए।20 का आधा 10, बेटे को दे दिए।20 का चौथ...