बहुत मजबूत रिश्ता है मेरा और मेरे परमेश्वर का

                  बहुत मजबूत रिश्ता है मेरा और मेरे परमेश्वर का


एक सेठ के यहां नौकर काम करता था 1 दिन नौकर अनुपस्थित हो गया, तो सेठ ने सोचा इसकी तनख्वाह बढ़ा देता हूं तो यह रोज काम पर आने लगेगा । जब महीने की आखिरी तारीख को सेठ ने तनख्वाह बढ़ा कर दी ,तो उस व्यक्ति ने कुछ नहीं कहा चुपचाप तनख्वाह ले ली। कुछ टाइम बाद उसने फिर छुट्टी कर ली , तो सेठ को बहुत गुस्सा आया उसने सोचा कि इस पर कोई असर नहीं हुआ ,मैं इस की तनख्वाह बढ़ाई फिर भी इसने छुट्टी कर ली। तो उसने  सोचा ,मैं इसकी तनख्वाह कम कर देता हूं ।महीने के आखिरी तारीख को जब सेठ में तनख्वाह कम कर ,कर दी तो भी उस व्यक्ति ने चुपचाप ले ली, कुछ नहीं कहा तो सेठ को बहुत हैरानी हुई ,उसने उससे पूछा कि मैंने जब तुम तुम्हारी तनख्वाह बढ़ाई तब भी तुमने कुछ नहीं कहा और जब कम करदी, तब भी तुमने कुछ नहीं कहा तो नौकर बोला मैंने जब पहले छुट्टी ली थी तो मेरे घर मे बच्चे ने जन्म लिया था तो मैंने सोचा ईश्वर ने उसके भाग्य का पैसा मुझे दे दिया, और जब आप ने दूसरी बार मेरी तनख्वाह कम कर दी, उस समय मैंने जब छुट्टी ली तो मेरी मां का देहांत हो गया था तो मैंने सोचा मां अपने भाग्य का पैसा अपने साथ ले गई । तो इसमें चिंता किस बात की। मेरा ईश्वर मेरा ध्यान रखता है तो फिर मैं क्यों चिंता करूं। मेरा ईश्वर मेरी तनख्वाह का सब हिसाब रखता है।
 बहुत मजबूत रिश्ता है मेरा और मेरे परमेश्वर का,ज्यादा मैं मांगता नहीं और कम वह देता नहीं ।

।।जय श्री राधे ,जय सियाराम।।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

श्री राधा कवच

भजन- गोवर्धन वासी सांवरे तुम बिन रहा न जाए-------

क्या आप जल्दी ही सभी दुखों से मुक्ति चाहते हैं तो श्री रामायण मनका 108 का हफ्ते में एक बार पाठ जरूर करें।

आपके कल्याण की पक्की गारंटी, छप्पय छंद

भगवान श्रीकृष्ण ने अपने माता-पिता के लिए बनाये थे - ब्रज में चार धाम

राम रक्षा स्तोत्र हिदी में

जब मन दुखी हो तो क्या करें?