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कुंभ स्नान क्या होता है,इसका महत्व क्या है?

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                        कुंभ स्नान क्या होता है,इसका महत्व क्या है? "कुंभ" एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है घड़ा या कलश। यह शब्द विभिन्न संदर्भों में उपयोग किया जाता है: 1. कुंभ मेला कुंभ मेला भारत का एक विशाल धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है, जो चार स्थानों (हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक) पर 12 वर्षों के अंतराल पर आयोजित होता है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है। 2. ज्योतिष में कुंभ (राशि) कुंभ भारतीय ज्योतिष में बारह राशियों में से एक राशि है। इसे अंग्रेज़ी में "Aquarius" कहते हैं। यह राशि शनि ग्रह द्वारा शासित मानी जाती है और इसका प्रतीक एक घड़ा लिए हुए व्यक्ति होता है। 3. संस्कृति और धार्मिक संदर्भ धार्मिक अनुष्ठानों में कुंभ (कलश) का विशेष महत्व होता है। इसे शुभता, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। पूजा-पाठ में जल से भरे कुंभ का उपयोग किया जाता है। कुंभ स्नान कुंभ मेले के दौरान गंगा, यमुना, सरस्वती और गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में किया जाने वाला धार्मिक स्नान है। इसे हिंदू धर्म में अत...

कोई भी टेंशन दिमाग से नहीं निकाल पाते हैं क्या करूं?/koi bhi tension dimag se nahin nikal paata hun kya karun

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     कोई भी टेंशन दिमाग से नहीं निकाल पाते क्या करूं?  हमें अपने दिमाग को कभी खाली नहीं छोड़ना चाहिए। खाली दिमाग है तो गंदगी ही तो भरेगा,जितनी nagative विचार इकठ्ठा कर सकता है करेगा। अगर हम परमात्मा का चिंतन करेंगे तो सारी नकारात्मकता डिलीट हो जाएगी, अगर हमें कोई भी व्यक्ति ऐसा मिलता है जिसने कभी हमको गलत बोला हो तो, वह हमें जब भी मिलेगा तो हमें पुरानी सारी बातें फिर याद आ जाएगी। इसलिए सभी द्वेष को खत्म कर दो और भगवत चिंतन करो, आनंद पूर्वक भगवत चिंतन के बिना ऐसा कोई उपाय नहीं है जिससे आप अपने दिमाग की टेंशन को निकाल सको। अध्यात्म के बिना आप इन सब नेगेटिव बातों को खत्म नहीं कर सकते, कितनी भी भारी से भारी समस्याएं हो, भारी से भारी विपत्ति को हम नष्ट कर सकते है भगवान के चिंतन के द्वारा। चाहे राम जपो, कृष्ण जपों ,जो भी नाम प्रिय हो उसका जाप करो। अपने दिमाग को व्यस्त रखो, इसे खाली छोड़ोगे  तो यह हर समय टेंशन ही देगा। बिना जाप के आपकी किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। यह संसार शोक का धाम है, चारों ओर कामनाओं का जाल बिछा हुआ है। एक कामना खत्म होती हैं तो दूसरी ...

विनती व प्रार्थना का क्या महत्व हैं? /vinti v prarthna ka mahtav/ परमार्थ के पत्र पुष्प में से

          विनती व प्रार्थना का सबसे बड़ा महत्व है। विनती और प्रार्थना का महत्व –  व्यक्ति के भावनात्मक, मानसिक, और आध्यात्मिक जीवन में गहरी भूमिका निभाता है। इसका महत्व विभिन्न दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है: 1. आध्यात्मिक महत्व आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम होता है। ईश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर प्रदान करता है। नकारात्मक विचारों को दूर कर मन की शांति प्रदान करता है। 2. भावनात्मक और मानसिक महत्व मनोबल को बढ़ाने में सहायक होती है। चिंताओं और तनाव को कम करती है। आत्मविश्वास और धैर्य बढ़ता है। 3. सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व सामूहिक प्रार्थनाएं सामाजिक एकता को बढ़ावा देती हैं। धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में प्रार्थना का विशेष स्थान होता है। 4. आत्मचिंतन और आत्मनियंत्रण का साधन व्यक्ति को आत्मविश्लेषण करने का अवसर मिलता है। मनोबल और अनुशासन को प्रोत्साहन मिलता है। दादा गुरु भक्तमलीजी के श्री मुख से विनती व प्रार्थना के महत्व पर विचार  रामायण भागवत में स्तुति प्रकरण ही अधिक है।स्तुति में भगवान के स्वरूप का दया,क्षमा,करुण...