भाई जी के प्रवचन
भगवान की कृपा पर विश्वास है और उनके न्याय पर विश्वास है, दुनिया की कोई भी स्थिति नहीं बता सकती।
भगवान की कृपा पर विश्वास है और उनके न्याय पर विश्वास है, दुनिया की कोई भी स्थिति नहीं बता सकती।
भाई जी के श्री मुख से
स्नेह, प्रीति और तज्जनित त्याग जब भी भोगों के प्रतिपादन होता है, तब उसका नाम आशक्ति होता है और भगवान के प्रतिपादन होता है तो उसका नाम भक्ति होता है।
भाई जी श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी के अंतिम प्रवचन मैं आपके साथ प्रतिदिन साझा करता हूं, अगर हम अपने जीवन में आग्रह करें तो निश्चित रूप से हमारे जीवन में अमूल्य परिवर्तन हो जाएगा।
श्री राधे
भिक्षु भगवान में सच्चा विश्वास हो जाएगा, उसी के साथ उनका विवाह दुर्बलता दूर हो जाएगा, तुम्हारा भय भाग जाएगा और विपरीत विचारधारा वाले मन के आदर्श हो जाएंगे।
राम नाम की महिमा
‘रा=राक्षसानां मरणं यस्मात्। ’ ‘र’ का अर्थ है राक्षसगण ‘म’ का अर्थ है मकार का मरण। काम, क्रोध, मान, मद् आदि राक्षस जिससे मरते हैं वह है राम नाम। श्री कबीर के शिष्य श्री पद्मनाभ ने श्री राम नाम से कुष्ठी को निरोग किया। कबीर ने कहा कि गुरुदेव कृपा से नाम का इतना ही महत्व नहीं है, यह बंधन तो नाम के आभास से ही कट जाता है। रा का उच्चारण करने से पाप बाहर निकल जाते हैं। फिर मा का उच्चारण करने पर कपाट बंद हो जाता है। फिर मुख के बंद होने पर पाप प्रवेश नहीं कर पाते हैं अतः हरे राम महामंत्र विधि, अविधि जैसे भी जपा जाए कलयुग में विशेष फलप्रद है।
जैसे अनजाने में स्पर्श किया गया अग्नि भी जला देता है ऐसे ही हरि वह नाम है जो सभी के पाप तापों को करते हैं।
एक व्यक्ति वृंदावनजा रहा था दूसरे ने पैसे देकर कहां मेरे लिए एक तुलसी की माला लेते आना। अभी माला आई नहीं नाम -जाप हुआ नहीं ,परंतु केवल नाम जप करने का विचार मात्र किया था इतने से ही यमराज ने कहा अरे चित्रगुप्त ! माला मंगाने वाले के खाते को खत्म कर दो। महाराज उसे तो बहुत कर्मों के फल भोगने हैं। यमराज ने कहा नहीं–नहीं, अब वह नाम जप करने के लिए उत्सुक है। उसके ऊपर कृपा हो गई है उसे जीव के कर्म बंधन समाप्त हो जाए यही नाम का आभास है।
।।जय श्री राधे।।
भगवान की प्राप्ति का उपाय
‘रामो विग्रहवान धर्मः।’श्री राम धर्म की मूर्ति हैं।
‘श्री राम जय राम जय जय राम’ यह भगवान का नाम हैं और वैदिक मंत्र भी है। कम से कम 22 बार जप करने वाला धन्य है। राम नाम से बढ़कर कोई नाम नहीं है।इसका जप करने वाला भक्ति मुक्ति आदि अभीष्ट पदार्थ पाता है। भगवत्त प्राप्ति का उपाय क्या है यह जीव नही जानता, भगवान अपने आप ही बताते हैं।सदा जप, तप ,अनुष्ठान में निमग्न रहकर विश्व कल्याण की मांग करनी चाहिए।
मन में नाम लेने से मुक्ति प्राप्त होती है और वाणी द्वारा उच्च स्वर से कीर्तन करने वाले को भक्ति प्राप्त होती है।
उच्चस्वर से किया गया कीर्तन अपने तथा दूसरों के भी कानों को पवित्र कर देता है। अतः भक्तजन गौरांग प्रभु आदि ने उच्च स्वर से कीर्तन करने को श्रेष्ठ बताया है।
इसलिए ऊंचे स्वर से कीर्तन करने से भगवत प्राप्ति होती है।
कलयुग के कोप से कैसे बचें ?
कलिकाल में भगवान के नाम की तरह गुरुदेव का नाम, भक्तों का नाम जपना भी मंगलकारी है। नाम की महिमा सदा थी और आगे भी रहेगी,पर कलयुग में विशेष महत्व हैं। भगवान का नाम, और भगवान आप सभी का मंगल करें। गुरुत्व का बोध हो।
जो लोग कलियुग की निंदा करते हैं और उन दोषों को अपने में रखकर दोष कलियुग को देते हैं ,वे कलियुग के दोषों से बच नहीं सकते।
भगवान के नाम, रूप, लीला, धाम सभी मंगलकारी हैं। जंहा- जहां जो-जो लोग भगवान के आश्रय स्थल हैं वहां मंगल कल्याण की प्राप्ति होती है।
अतः कलयुग के कोप से बचने का एकमात्र उपाय है जितना हो सके भगवान के नाम का जाप करो।मन में करो चाहे उच्च स्वर में करो।
दादा गुरु भक्तमाली के श्री मुख से परमार्थ के पत्र पुष्प में से
।।जय श्री राधे।।
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