श्री वृंदावन धाम की महिमा – कुंज बिहारी के चरणों में मन कैसे लगाएँ?
श्री वृंदावन धाम की महिमा – कुंज बिहारी के चरणों में मन कैसे लगाएँ? वृंदावन केवल एक स्थान नहीं, बल्कि भक्तों के लिए प्रेम, भक्ति और समर्पण की भूमि है। ऐसा माना जाता है कि वृंदावन की रज में भी श्रीकृष्ण की लीलाओं की स्मृति बसी हुई है। यहाँ के कुंज, गलियाँ, यमुना तट और मंदिर भक्त के मन में एक अलग ही आध्यात्मिक भाव उत्पन्न करते है। दादा गुरु भक्तमाली श्री गणेशदास जी कहते है कि अगर आपको धाम के प्रति प्रेम बढ़ाना है तो नीचे लिखे श्री मान भगवत रसिकजी के छंदो का आप नित्य पाठ कर लिया करो:- पहला छंद प्रथम दरश गोविन्द, रूप के प्राण पियारे। दूजे मोहन मदन, सनातन शुचि उर धारे।। तीजे गोपीनाथ, मधु हँसि कंठ लगाए। चौथे राधारमण, भट्ट गोपाल लड़ाए।। पाँचै हित हरिवंश, सुवल्लभ राधा। छठवें युगल किशोर, व्यास मुख दियो अगाधा।। सातें श्रीहरिदास के कुंज बिहारी हैं जहाँ। भगवत रसिक अनन्य, मिलि वास करो निधिवन तहाँ।। 🌿 दूसरा छंद कुंजन ते उठि प्रात गात यमुना में धोवे। निधिवन करि दण्डवत् बिहारी को मुख जोवे।। करै भावना बैठि स्वच्छ थल रहित उपाधा। घर घर लै प्रसाद लँगै जब भोजन बाधा।। संग करे भगवत रसिक, कर करवा गूढ़र...