क्या आप भी जीवन के कठिन दौर से गुजर रहे हैं? जानिए कैसे एक टूटा हुआ मन परमात्मा से जुड़ने का माध्यम बन सकता है और कैसे आप फिर से आंतरिक शांति पा सकते हैं।
प्रस्तावना
जीवन में कभी-कभी ऐसा मोड़ आता है जब हम भीतर से पूरी तरह बिखर जाते हैं। भरोसा टूटता है, सपने टूटते हैं और कभी-कभी खुद पर से विश्वास भी उठ जाता है। ऐसे में हमें किसी ऐसे सहारे की तलाश होती है जो बिना शर्त हमें स्वीकार करे। वह सहारा सिर्फ परमात्मा है। लेकिन सवाल यह है कि जब मन अशांत हो, तो उस परम शक्ति से संपर्क कैसे साधें ?
1. शून्य को स्वीकार करें (Accept the Void)
परमात्मा से जुड़ने की पहली सीढ़ी है अपनी स्थिति को स्वीकार करना। जब आप टूटते हैं, तो आपके भीतर का अहंकार (Ego) भी टूटता है। इस 'शून्य' को डर से नहीं, बल्कि समर्पण से भरें। ईश्वर से कहें, "मेरे पास अब कुछ नहीं बचा, अब जो है वो तू ही है।"
2. मौन में संवाद (Conversation in Silence)
परमात्मा शोर में नहीं, सन्नाटे में मिलता है। जब शब्द खत्म हो जाएं, तो बस शांत बैठें। अपनी तकलीफ को छुपाएं नहीं, बल्कि उसे प्रार्थना की तरह बहने दें। आंसू भी एक तरह की प्रार्थना हैं जिसे ईश्वर बखूबी समझता है।
3. कृतज्ञता का अभ्यास (Practice Gratitude)
टूटे हुए मन में अक्सर शिकायतें होती हैं। लेकिन जुड़ने का असली तरीका 'शुक्राना' है। उन छोटी चीजों के लिए धन्यवाद दें जो अभी भी आपके पास हैं—जैसे आपकी सांसें, प्रकृति या किसी का साथ। जब आप धन्यवाद देते हैं, तो आपकी ऊर्जा की आवृत्ति (Frequency) परमात्मा से मिलने लगती है।
4. सेवा और सत्संग (Service and Connection)
जब हम दूसरों के दुख को कम करने की कोशिश करते हैं, तो हमारा अपना दुख छोटा लगने लगता है। किसी जरूरतमंद की मदद करना साक्षात ईश्वर की सेवा है। साथ ही, सकारात्मक विचारों वाले लोगों (सत्संग) के बीच रहें ताकि आपकी नकारात्मकता दूर हो सके।
5. समर्पण: "तेरा तुझको अर्पण"
अक्सर हम चीजों को कंट्रोल करना चाहते हैं, और जब वे नहीं होती, तो मन टूट जाता है। परमात्मा से जुड़ने का सबसे सरल मंत्र है—समर्पण। यह मान लेना कि जो हो रहा है उसमें कोई बड़ी योजना छिपी है, मन को असीम शांति देता है।
निष्कर्ष
टूटा हुआ मन अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। यह संकेत है कि अब आपको अपनी शक्ति से नहीं, बल्कि उस 'महाशक्ति' के सहारे की जरूरत है। बस एक कदम बढ़ाएं, वह बाहें फैलाए आपका इंतजार कर रहा है।
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।।जय श्री राधे।।








