छोटी-छोटी बातों पर बढ़ता गुस्सा: क्या हमारे समाज से करुणा खत्म होती जा रही है?
क्या समाज में करुणा और संवेदनशीलता खत्म हो रही है? जानिए छोटी-छोटी बातों पर बढ़ते झगड़ों के कारण, गीता की सीख और समाधान। छोटी-छोटी बातों पर बढ़ता गुस्सा: क्या हमारे समाज से करुणा खत्म होती जा रही है? सुबह घर से निकलते हैं तो सड़क पर किसी बात पर बहस होते देख लेते हैं। ट्रैफिक में हॉर्न बजाने पर लोग मारपीट पर उतर आते हैं। पड़ोसियों में छोटी-सी बात महीनों की दुश्मनी बन जाती है। परिवारों में रिश्ते टूट रहे हैं। सोशल मीडिया पर शब्दों की हिंसा बढ़ रही है। कभी-कभी तो मामूली विवाद भी ऐसी दुखद घटनाओं में बदल जाता है, जिन्हें देखकर मन कांप उठता है। ऐसे में मन एक ही प्रश्न पूछता है—क्या वास्तव में हमारे समाज से करुणा, धैर्य और संवेदनशीलता समाप्त होती जा रही है? क्या इंसान पहले जैसा नहीं रहा? हर पीढ़ी को लगता है कि पहले के लोग अधिक सरल थे। यह पूरी तरह सही नहीं है, लेकिन इतना अवश्य है कि आज की जीवनशैली ने मनुष्य के भीतर बेचैनी और असहिष्णुता बढ़ा दी है। आज व्यक्ति के पास साधन अधिक हैं, लेकिन मन की शांति कम है। मोबाइल है, इंटरनेट है, पैसा है, लेकिन धैर्य नहीं है। ज्ञान है, लेकिन आत्मज्ञान नहीं है। छो...