क्या आप भी पुरानी बातों को भूल नहीं पा रही हैं? जानिए क्यों।
जब एक ही बात पर बार-बार रोना आए: क्या यह कमजोरी है या हीलिंग का रास्ता? हम इंसान अजीब हैं। हम एक ही चुटकुले पर दूसरी बार नहीं हंस सकते, लेकिन एक ही पुरानी याद, एक ही घटना या एक ही बात हमें सालों बाद भी वैसे ही रुला सकती है, जैसे वह आज ही हुई हो। अक्सर लोग खुद से पूछते हैं— "क्या मैं कमजोर हूँ? मैं इस बात को पीछे क्यों नहीं छोड़ पा रही? आखिर कब तक एक ही दुख के सागर में गोते लगाती रहूँगी?" आज के इस ब्लॉग में, हम इसी सवाल की तह तक जाएंगे कि बार-बार रोना आखिर क्यों होता है और क्या यह वास्तव में कोई समस्या है या हमारे मन का एक उपचार? 1. हंसी और आंसू का मनोविज्ञान हंसी हमारे मस्तिष्क की एक त्वरित प्रतिक्रिया (Immediate Reaction) है। जैसे ही हमारा दिमाग किसी 'सरप्राइज' या 'असंगति' (Incongruity) को पकड़ता है, हम हंसते हैं। लेकिन जैसे ही वह सरप्राइज खत्म होता है, हंसी भी काफूर हो जाती है। इसके विपरीत, 'रोना' एक प्रक्रिया (Process) है। जब हम किसी बात पर रोते हैं, तो वह केवल उस पल का दुख नहीं होता। वह हमारे अवचेतन मन (Subconscious mind) की गहराइयों में ...