जप माला में 'मेखला' (सुमेरु) का महत्व
जप माला का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक रहस्य: मेखला, मनके और माला के नियम प्रस्तावना सनातन धर्म में जप माला का उपयोग सदियों से चला आ रहा है। चाहे वह ऋषि-मुनि हों या सामान्य साधक, माला हमेशा से ही एकाग्रता का मुख्य माध्यम रही है। अक्सर लोग माला तो धारण कर लेते हैं, लेकिन वे इसके पीछे के सूक्ष्म विज्ञान और नियमों से अनभिज्ञ रहते हैं। माला का हर मनका, उसके बीच का धागा और सबसे महत्वपूर्ण—'मेखला' (सुमेरु), ये सभी एक विशेष ऊर्जा चक्र का हिस्सा हैं। इस लेख में हम जप माला से जुड़ी उन बारीकियों को समझेंगे जो आपके आध्यात्मिक सफर को बदल सकती हैं। 1. जप माला में 'मेखला' (सुमेरु) का महत्व माला में 108 मनके होते हैं, लेकिन इन मनकों के बीच एक बड़ा मनका होता है जिसे 'मेखला', 'सुमेरु' या 'गुरु मनका' कहा जाता है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण आध्यात्मिक दृष्टि से सुमेरु को 'ब्रह्मांड का केंद्र' माना गया है। जिस प्रकार पृथ्वी के केंद्र में सुमेरु पर्वत है, वैसे ही माला के चक्र में यह गुरु का स्थान है। जब हम जप करते हैं, तो यह माला एक बंद परिपथ (Circuit) की त...