ज्यादा सोचने (overthinking) से कैसे बचें?
'कल' का भ्रम और 'आज' की ताकत: वर्तमान में जीना ही जीवन का वास्तविक रहस्य "ओवर थिंकिंग हमेशा या तो बीते हुए कल के पछतावे से जुड़ी होती है, या आने वाले कल के डर से। भगवान श्रीकृष्ण हमें समझाते हैं कि बीता हुआ कल केवल एक स्मृति है और भविष्य केवल एक कल्पना। वास्तविक जीवन केवल वर्तमान क्षण में ही घटित होता है।" आज की भागदौड़ भरी दुनिया में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो ओवरथिंकिंग (Overthinking) की समस्या से न जूझ रहा हो। मन लगातार अतीत की घटनाओं को दोहराता रहता है या भविष्य की अनिश्चितताओं से डरता रहता है। परिणामस्वरूप, वर्तमान का सुंदर क्षण भी हमारी आँखों के सामने से निकल जाता है। भगवद्गीता का ज्ञान हमें यही सिखाता है कि मनुष्य का अधिकार केवल वर्तमान क्षण पर है। यदि हम वर्तमान में जीना सीख लें, तो जीवन की अधिकांश मानसिक परेशानियाँ स्वतः समाप्त हो सकती हैं। ओवरथिंकिंग क्या है? ओवरथिंकिंग का अर्थ है किसी बात के बारे में आवश्यकता से अधिक सोचना। कई बार हम ऐसी घटनाओं के बारे में सोचते रहते हैं जिन्हें हम बदल ही नहीं सकते। जैसे— काश मैंने ऐसा नहीं किया होता। अगर मैं...