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वैदिक प्रार्थना- ॐ सहनाववतु का भावार्थ

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                    ॐ सह नाववतु का भावार्थ- ॐ   सह नाववतु ।सह नौ भुनक्तु सह वीर्य करवावहै । तेजस्वी नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ।  ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ।। ॐ वह प्रसिद्ध परमेश्वर हम शिष्य और आचार्य दोनों की साथ-साथ रक्षा करें। हम दोनों को साथ साथ विद्या के फल का भोग कराए। हम दोनों एक साथ मिलकर वीर्य यानी विद्या की प्राप्ति के लिए सामर्थ्य प्राप्त करें। हम दोनों का पढा हुआ तेजस्वी हो, हम दोनों परस्पर द्वेष ना करें।  ॐ शांतिः शांतिः शांतिः  (कृष्ण यजुर्वेद)

वैदिक प्रार्थना भावार्थ के साथ

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                      वैदिक प्रार्थना ॐ पूर्णमद:             ॐ पूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्ण मुदच्यते।              पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।।              ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ।।  भावार्थ- ॐ यानी कि वह (परब्रह्म) पूर्ण है।  यह (कार्यब्रह्रम) भी पूर्ण है, क्योंकि पूर्ण से पूर्ण ही निकलता है, (प्रलयकाल में) पूर्ण (कार्य ब्रह्म) का पूर्णत्व लेकर पूर्ण (परब्रह्म) ही शेष रहता है। ॐ शांति: शांति: शांति: (यजुर्वेद)।।

प्रार्थना- एक ओंकार का अर्थ

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                 प्रार्थना एक ओंकार का भावार्थ- एक ओंकार सतनाम कर्ता पुरूष निर्भऊ निर्वैर अकाल मूरत अजूनी   सैभं गुरुप्रसाद जप। आदि सच, जुगादि सच, है भी सच , नानक होसी भी सच। वाहेगुरु।। परमात्मा एक है।उसका नाम सत्य है, अर्थात वह सदा स्थिर और एक रस है ।सृष्टि का कर्ता है, निर्भय और निवैंर है, उसका स्वरूप काल से परे है, वह समय के चक्र में कभी नहीं आता - मृत्यु, रोग और बुढ़ापा उसके लिए नहीं है ।वह अजन्मा है, स्वयंभू है ,पथ-प्रदर्शक है और कृपा की मूर्ति है । हे मनुष्य ! तू उसे जप।