पैर और चरण में क्या अंतर है?
पैर और चरण में क्या अंतर है :- रावण भगवान का शिव का बहुत बड़ा भक्त था, हम तो यदि भगवान शिव के ऊपर एक लोटा दूध भी चढाते है,तो वो भी पानी मिला होता है। रावण ने तो १० शीश चढा दिए,हम तो ठीक-ठीक प्रकार वेद का पाठ भी नहीं कर सकते,एक वेद को पढ़ने के लिए १२ वर्ष लगते है,यदि उम्र भी बीत जाए तब भी हम चारो वेद को ठीक प्रकार से नहीं पढ़ सकते,रावण चारो वेदों का ज्ञाता था और वेदों पर भाष्य रावण ने लिखा. नवग्रह से लेकर समस्त देवी-देवता उसके यहाँ नौकरी करते थे,काल रावण के वश में था.ब्रह्मा जी स्वयं उसके आँगन में आकर पाठ करते थे,स्वर्ग लोक से लेकर कैलाश तक रावण की पहुँच थी.इतना सब कुछ होने पर भी रावण की कोई पूजा नहीं करता.कोई अपने बेटे का नाम रावण नहीं रखता.क्यों ? उसका एक ही कारण था.सब कुछ होने पर भी रावण "आचरणहीन" था.जिसके जीवन में आचरण की शुद्धता नहीं वह चाहे कितना भी ऊँचा क्यों न हो,उसका जीवन शून्य है,जीवन में आचरण की शुद्धता बहुत जरुरी है.चरण उनके पूजनीय हो सकते है जिसका आचरण अच्छा हो. पैर और चरण में बहुत बड़ा अंतर है. हम सभी के ...