हम अपने बने।
अपने बने दुखी व्यक्ति के लिए वास्तव में यह संसार दुःख का जंगल हैं। दुःख से घिरे हुए व्यक्ति के अंदर केवल एक ही विचार कार्य करता हैं कि वह अकेला हैं और सब और से घृणा से भरा हैं। उसे ऐसा लगता हैं कि कोई भी व्यक्ति को उससे संवेदना नहीं हैं और न ही उसके प्रति कोई आकृष्ट नहीं हैं। और तो और उसका स्वंय पर से भी विश्वास उठ जाता हैं। पर उसके मन से यह बात अलग नहीं होती कि शायद किसी अन्य के द्वारा उसे दुःख से छुट्टी मिल जाए। दुःख के समय मन से किसी प्रकार की सहायता नही मिलती ;क्योंकि उसकी अनर्गल इच्छाएisही दुःख उत्पन्न करती हैं.इच्छाओ से उत्पन्न सुख को तो वह गले लगा ...