श्री कृष्ण जी के नामों के अर्थ का वर्णन
श्री कृष्ण जी के नामों के अर्थ का वर्णन परम भागवत श्री संजय जी के द्वारा- श्री कृष्णा माया से आवरण करते हैं , यानी कि ढके रहते हैं और सारा जगत उन में निवास करता है ,तथा वे प्रकाशमान है इसलिए इन्हें 'वासुदेव' कहते हैं। अथवा सब देवता इन में निवास करते हैं, इसलिए इन्हें 'वासुदेव' कहते हैं। सर्व व्यापक होने के कारण इनका नाम विष्णु है। मा यानी आत्मा कि उपाधि रूप बुद्धि वृत्ति को ,मौन, ध्यान या योग से दूर कर देते हैं ।इससे श्री कृष्ण का नाम 'माधव' है। मधु अर्थात पृथ्वी आदि तत्वों के संहार-कर्ता होने से अथवा वे सब तत्व इन में लय को प्राप्त होते हैं।इन्हें 'मधुहा' भी कहते हैं । मधु नामक देत्य का वध करने के कारण इनका नाम 'मधुसूदन' कहा जाता है । कृषि शब्द सत्ता वाचक है व 'ण 'सुख वाचक है, दोनों धातु के अर्थ रूप सत्ता व आनंद के संबंध से भगवान का नाम 'कृष्ण' हो गया। अक्षय ,अविनाशी ,परम स्थान का या हृदय कमल का नाम पुंडरीक है, भगवान वासुदेव उस में विराजित रहते हैं और उसका कभी क्षय नहीं होता ,इसलिए इन्हें 'पुंडरीकाक्ष' भी ...