भजन कैसे करें
'भजन करना ' एक बात है और 'भजन होना' दूसरी बात है। हम सांस लेते नहीं है, हमें सांस आती है ।सांस लेने के लिए अभ्यास नहीं करना पड़ता, ना किसी शास्त्रज्ञ या सत्संग की आवश्यकता होती है। सांस सहज ही आती हैं ,कभी रुक जाती हैं, तो परम व्याकुलता होती है। इसी प्रकार सांस की भांति ,भजन होना चाहिए। क्षणभर भजन छुटने से व्याकुलता हो जाए ,तभी भजन है।
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