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शिव तांडव स्त्रोत हिंदी अनुवाद के साथ

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                         शिव तांडव स्त्रोत (हिंदी में) कहते हैं कि देवों के देव महादेव की उपासना इंसान को जीवन-मृत्यु में के काल चक्र से मुक्ति दिला देती है. शिव की अराधना में तांडव स्तोत्र का पाठ करने से भोलेनाथ का आशीर्वाद आजीवन संकट से बचाने के लिए कवच का काम करता है. जटा टवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले, गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम् | डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं, चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ||१||   जिन्होंने जटा रूपी वन से निकलती हुई गंगा जी के गिरते हुए प्रभाव से पवित्र किए गए गले में सर्पों की लटकती हुई विशाल माला को धारण कर ,डमरु के डम डम शब्दों से मंडित प्रचंड तांडव किया वह शिवजी हमारा कल्याण करें।। 1।। जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिम्प निर्झरी, विलो लवी चिवल्लरी विराजमान मूर्धनि | धगद् धगद् धगज्ज्वलल् ललाट पट्ट पावके किशोर चन्द्र शेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ||२||  जिनका मस्तक जटा रूपी कड़ाह में वेग से घूमती हुई गंगा जी के चंचल तरंग लताओं से सुशोभित ...

रुद्राष्टक

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श्री रुद्राष्टकम (हिंदी अनुवाद)

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                      श्री रुद्राष्टकम( हिंदी अनुवाद)   नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १॥ हे ईशान मैं मुक्ति स्वरूप ,समर्थ, सर्व व्यापक, ब्रह्म, वेद स्वरूप ,निज स्वरूप में  स्थिति, निर्गुण ,निर्विकल्प ,निरीह, अनंत ज्ञानमय और आकाश के समान सर्वत्र व्याप्त प्रभु को प्रणाम करता हूं।।1                                निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् । करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥ २॥  जो निराकार हैं ,ओंकाररूप आदि कारण है ,तुरीय है, वाणी ,बुद्धि और इंद्रियों के पथ से परे हैं, कैलाश नाथ हैं, विकराल और महाकाल के भी काल, कृपाल ,गुणों के आगार और संसार से तारने वाले हैं ,उन भगवान को मैं नमस्कार करता हूं।।2   तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं मनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् । स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा लसद्भा...

शिव स्त्रोत

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                           भगवान शिव को नमस्कार है  नमः शम्भवाय  च मयोभवाय  च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।।--------रूद्राय नमो अस्तु।  हिन्दी में भावार्थ - कल्याण एवं सुख के मूल स्त्रोत भगवान शिव को नमस्कार है। कल्याण के विस्तार करने वाले तथा सुख के विस्तार करने वाले भगवान शिव को नमस्कार है। मंगल स्वरूप और मंगलमयता की सीमा भगवान शिव को नमस्कार है।  जो संपूर्ण विद्याओं के ईश्वर, समस्त भूतों के अधीश्वर,  ब्रह्म वेद के अधिपति ,ब्रह्मा -बल-वीर्य के प्रतिपालक तथा साक्षात ब्रह्मा एवं परमात्मा है, वह  सच्चिदानंदमय शिव मेरे लिए नित्य कल्याण स्वरूप बने रहे।  परमेश्वर रूप अंतर्यामी  पुरुष को हम जाने ,उन महादेव का चिंतन करें ,वह भगवान रूद्र हमें संद्धर्म के लिए प्रेरित करें।  जो अघोर हैं घोर हैं  घोर से भी घोरतर है और जो सर्व संहारो रूद्र रूप है, आपके उन सभी स्वरूपों को मेरा नमस्कार है।  प्रभु आप ही वामदेव, ज्येष्ठ, श्रेष्ठ, रुद्र, क...

प्रार्थना एक ओंकार का भावार्थ

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                सिख प्रार्थना एक ओंकार का भावार्थ- एक ओंकार सतनाम कर्ता पुरूष निर्भऊ निर्वैर अकाल मूरत अजूनी   सैभं गुरुप्रसाद जप। आदि सच, जुगादि सच, है भी सच , नानक होसी भी सच। वाहेगुरु।। परमात्मा एक है।उसका नाम सत्य है, अर्थात वह सदा स्थिर और एक रस है ।सृष्टि का कर्ता है, निर्भय और निवैंर है, उसका स्वरूप काल से परे है, वह समय के चक्र में कभी नहीं आता - मृत्यु, रोग और बुढ़ापा उसके लिए नहीं है ।वह अजन्मा है, स्वयंभू है ,पथ-प्रदर्शक है और कृपा की मूर्ति है । हे मनुष्य ! तू उसे जप।

दूसरों का भला करने से बड़ा कोई धर्म नहीं है

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         दूसरों का भला करने से बड़ा कोई धर्म नहीं है।                   परहित सरिस धर्म नहीं भाई कविवर रहीम का प्रसिद्ध दोहा है - यो रहीम सुख होत है उपकारी के संग  बाँटन वारे को लगे ज्यो मेहंदी के रंग।।  दूसरों की भलाई करने वाला उसी प्रकार से सुखी होता है जैसे दूसरों के हाथों पर मेहंदी लगाने वाले की उंगलियों खुद भी मेहंदी के रंग में रंग जाती है। जो इत्र बेचते हैं ,वह खुद उसकी खुशबू से महकती रहते हैं। जिस प्रकार एक फूल बेचने वाले के कपड़ों और बदन से फूलों की सुगंध नहीं जा सकती। उसी प्रकार दूसरों की भलाई करने वाले व्यक्ति का का भी अहित नहीं हो सकता। दूसरों की मदद अथवा परोपकार निःसन्देह  बड़ा महत्व है ।प्रत्यक्ष रुप से ही नहीं, परोक्ष रूप से भी इसका बड़ा महत्व है। एक बुढ़िया थी ,जो बहुत कमजोर , बीमार थी। रहती भी अकेली थी । उसके कंधों में दर्द रहता था ।लेकिन वह इतनी कमजोर थी कि खुद अपने हाथों से दवा लगाने में भी असमर्थ थी ,कंधों पर दवा लगाने के लिए कभी किसी से विनती करती तो कभी किसी से। एक ...