bhakt himmtdas
भक्त हिम्मतदास भगवान सदा अपने भक्तो का ध्यान रखते हैं। उनके बड़े से बड़े कष्टो को पलमात्र में नष्ट कर देते हैं, परन्तु वह उन्ही भक्तो का साथ देते हैं जो पूर्णरूप से प्रभु के चरणो में समर्पित हो जाते हैं। ऐसे ही प्रभु के कृपापात्र हुए हैं -भक्त हिम्मतदास। हिम्मतदास और उनकी पत्नी में अगाध प्रेम था। दोनों ही भगवान के प्रति पूर्ण समर्पित थे। एकबार लक्ष्मीजी ने भगवान से पूछा कि महाराज क्या आपसे बड़ा भी कोई हैं ? भगवान विष्णु ने सरल भाव से कहा -हाँ हैं , वह हैं हमारा भक्त। लक्ष्मीजी ने कहा -तब तो वे रिश्ते में मेरे जेठ हुए। जेठ अथवा ससुर से नारियो में पर्दे का विधान हैं अत:मैं भी आपके भक्तो से पर्दा करती रहूंगी। आप देखते हैं कि जो भगवान का सच्चा भक्त होता हैं वह लक्ष्मीजी की कृपा से तो वंचित रहता हैं परन्तु प्रभु की कृपा का पात्र बन जाता हैं , और प्रभु उसके सभी कष्टो को दूर करने के लिए वैसा ही रूप धारण कर लेते हैं , जिससे उसके कष्ट दूर हो। इसी प्रकार भक्त हिम्मतदास भी अपनी पत्नी के साथ प्रभु चरणो में लीन होकर राम नाम जपते थे...