भाई जी के श्री मुख से
स्नेह, प्रीति और तज्जनित त्याग जब भी भोगों के प्रतिपादन होता है, तब उसका नाम आशक्ति होता है और भगवान के प्रतिपादन होता है तो उसका नाम भक्ति होता है।
शिकायत से शुक्राने तक: जीवन बदलने वाला महामंत्र प्रस्तावना: क्या हम वास्तव में जी रहे हैं? आज के आधुनिक युग में इंसान एक ऐसी दौड़ में श...
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जय श्री राधे