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भाई जी के प्रवचन 2

             


              भाई जी के श्री मुख से 


स्नेह, प्रीति और तज्जनित त्याग जब भी भोगों के प्रतिपादन होता है, तब उसका नाम आशक्ति होता है और भगवान के प्रतिपादन होता है तो उसका नाम भक्ति होता है।


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जय श्री राधे

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