भगवान से शिकायत भी एक प्रकार की भक्ति है”
अगर चाहें तो अगला स्टेप हम ये कर सकते हैं 🌷
🌼 भगवान से शिकायत भी एक प्रकार की भक्ति है
जब मन बहुत थक जाता है,जब प्रार्थनाएँ अधूरी लगती हैं,
और जब आँसू अपने आप बहने लगते हैं —तब हम भगवान से शिकायत करने लगते हैं। अक्सर हमें सिखाया जाता है कि ईश्वर से शिकायत करना गलत है।
लेकिन सच यह है कि
👉 जिससे शिकायत की जाती है, उसी पर सबसे ज़्यादा भरोसा होता है।
🌿 शिकायत दूरी नहीं, अपनापन दिखाती है
हम अजनबियों से शिकायत नहीं करते। हम शिकायत उसी से करते हैं जिसे अपना मानते हैं। जब कोई भक्त कहता है —
“भगवान, आपने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?”
तो यह अविश्वास नहीं, यह हक़ है…
और हक़ केवल अपने पर जताया जाता है।
🌸 रोकर की गई प्रार्थना भी पूजा है
हर प्रार्थना फूलों और मंत्रों से नहीं होती। कुछ प्रार्थनाएँ आँसुओं से भी होती हैं। जब मन टूटकर भगवान से कहता है —
“अब मुझसे और सहा नहीं जाता”तो वही पल सबसे सच्ची भक्ति का होता है।
परमात्मा शब्द नहीं देखते, वे भाव देखते हैं।
🌼 शिकायत में भी छुपा होता है समर्पण
अगर हमें विश्वास न होता कि भगवान सुन रहे हैं,
तो हम शिकायत ही क्यों करते?
शिकायत दरअसल यह कहती है —
“मुझे भरोसा है कि आप समझेंगे।” और यही भरोसा
भक्ति की सबसे गहरी जड़ है।
🌺 ईश्वर हमारे प्रश्नों से नाराज़ नहीं होते
माँ अपने बच्चे की जिद, रोना, सवाल सब सह लेती है,
क्योंकि उसे पता है —बच्चा उसी पर भरोसा करता है।
वैसे ही परमात्मा भी हमारे सवालों, नाराज़गी और शिकायतों को
प्रेम से सुनते हैं।
इसलिए प्रभु के आगे अपने सुविधाजनक आसन पर बैठिए,इसके
लिए आप यहां से देख सकते है:-
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🌸 अंत में एक सत्य
अगर आपके मन में भी कभी भगवान से शिकायत आई है,
तो खुद को दोषी मत मानिए।
👉 शायद वही आपकी सबसे सच्ची भक्ति थी।
क्योंकि
भगवान से शिकायत भी,
भगवान से जुड़ने का ही एक तरीका है। 🌼🙏
“जिससे हम शिकायत करते हैं, उसी पर हमें सबसे ज़्यादा भरोसा होता है।”
👉 “बहुत से लोग मन की शांति के लिए रुद्राक्ष माला का सहारा लेते हैं।”
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✍️ लेखिका: रेणु शर्मा – Parmatma Aur Jivan
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।।जय श्री राधे।।

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जय श्री राधे