जब जीवन हराता है, तब परमात्मा तैयार करते हैं | आध्यात्मिक जीवन सत्य
हम जीवन में जब भी हारते हैं, मन सबसे पहले यही पूछता है —
“मेरे साथ ही ऐसा क्यों?”
उस पल हार बोझ लगती है, अपमान लगती है, और कई बार तो ईश्वर से दूरी भी महसूस होती है।
लेकिन समय बीतने पर, जब पीछे मुड़कर देखते हैं, तब समझ आता है —
👉 वह हार, दरअसल किसी बड़ी तैयारी का पहला चरण थी।
🌸 हार हमें तोड़ती नहीं, गढ़ती है
परमात्मा कभी भी हमें सीधे ऊँचाई पर नहीं बैठाते।
वे पहले हमें झुकना सिखाते हैं —
ताकि अहंकार टूटे,
ताकि धैर्य जन्म ले,
और ताकि हम दूसरों के दर्द को समझ सकें।
जो इंसान कभी हारा ही नहीं,
वह दूसरों के आँसू कैसे पहचानेगा?
🌼 हर असफलता में छुपा होता है ईश्वर का संकेत
जब कोई रास्ता बंद होता है,
तो समझ लीजिए — परमात्मा हमें उस दिशा से बचा रहे हैं।
हम जिसे हार कहते हैं,
ईश्वर उसे कहते हैं — “रुको, अभी नहीं।”
कई बार जो हम चाहते हैं,
वह हमारे लिए सही नहीं होता,
और जो सही होता है,
उसके लिए हमें पहले मजबूत बनना पड़ता है।
🌺 हार हमें भीतर से साफ करती है
हार हमें सिखाती है —
धैर्य रखना
स्वयं पर विश्वास करना
और सबसे ज़रूरी — परमात्मा पर भरोसा करना
जब सब सहारा छूट जाता है,
तभी तो ईश्वर का हाथ महसूस होता है।
🌿 जो आज हार है, वही कल कथा बनेगी
आज जो आँसू हैं,
कल वही अनुभव बनेंगे।
आज जो चुप्पी है,
कल वही शब्दों में बदलकर
किसी और के जीवन को सहारा देंगे।
परमात्मा कभी भी व्यर्थ पीड़ा नहीं देते।
वे हर हार को
किसी नई भूमिका की तैयारी बनाते हैं।
🌸 अंत में एक सत्य
अगर आज आप हारे हुए महसूस कर रहे हैं,
तो निराश मत होइए।
👉 संभव है परमात्मा आपको उस जीवन के लिए तैयार कर रहे हों,
जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की है।
जीवन की हर हार, एक नई शुरुआत की तैयारी होती है। 🌼
बस भरोसा बनाए रखिए… परमात्मा देर करते हैं, अंधेर नहीं।
।।जय श्री राधे।।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
अगर आपको मेरी post अच्छी लगें तो comment जरूर दीजिए
जय श्री राधे