सकट चौथ क्यों मनाया जाता है? | Sakta Chauth Vrat Mahatva
भूमिका
हिंदू धर्म में व्रत-त्योहार केवल परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और संस्कारों का प्रतीक होते हैं। सकट चौथ, जिसे संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है, माताओं द्वारा अपनी संतान की रक्षा, लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए किया जाने वाला अत्यंत पावन व्रत है।
सकट चौथ क्यों मनाते हैं?
1. संतान की लंबी आयु और सुरक्षा के लिए
सकट चौथ का व्रत मुख्य रूप से माताएँ अपनी संतान के लिए करती हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से बच्चों पर आने वाले सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और उन्हें स्वस्थ व दीर्घायु जीवन प्राप्त होता है।
2. भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए
यह व्रत भगवान श्री गणेश को समर्पित होता है, जिन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है। सकट चौथ के दिन गणेश जी की पूजा करने से जीवन की बाधाएँ, दुख और मानसिक परेशानियाँ दूर होती हैं।
3. संकटों से मुक्ति के लिए
“संकष्टी” शब्द का अर्थ ही होता है – कष्टों से छुटकारा। इस दिन व्रत रखने से परिवार में आने वाली परेशानियाँ, रोग और नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।
4. मातृत्व प्रेम और त्याग का प्रतीक
यह व्रत माँ के निस्वार्थ प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक है, जहाँ माँ अपने कष्ट सहकर संतान के सुख की कामना करती है।
सकट चौथ से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय माता पार्वती ने अपने पुत्र गणेश जी को संकट से बचाने के लिए यह व्रत किया था। माता के व्रत और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने उन्हें वरदान दिया कि जो भी माता इस दिन श्रद्धा से व्रत करेगी, उसकी संतान सदैव सुरक्षित रहेगी। तभी से सकट चौथ का व्रत संतान-सुख देने वाला माना जाता है।
सकट चौथ का व्रत कौन करता है?
माताएँ अपनी संतान के लिए
कई स्थानों पर पिता भी परिवार की सुख-शांति के लिए
कुछ महिलाएँ विवाह, स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति के लिए भी करती हैं
सकट चौथ व्रत का फल
संतान की रक्षा और दीर्घायु
घर में सुख-शांति और समृद्धि
जीवन के कष्टों और विघ्नों में कमी
भगवान गणेश की विशेष कृपा 🌼
निष्कर्ष
सकट चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि माँ और संतान के बीच अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से हर संकट पर विजय पाई जा सकती है।
।।श्री गणेश।।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
अगर आपको मेरी post अच्छी लगें तो comment जरूर दीजिए
जय श्री राधे