संसार में कैसे रहे




मनुष्य का प्रथम कर्तव्य हैं कि  किसी भी कार्य को करने  से पहले अच्छी तरह से विचार कर ले। बिना  सोचे विचार किसी भी काम को न करे। कर्म का फल क्या मिलेगा यह पहले ही विचार  कर  लेना चाहिए। हम जो भी कार्य या कर्म करते हैं उसका  सिंह अवलोकन करना चाहिए। सिंह का स्वभाव होता हैं कि वह कुछ दूर चलता हैं फिर पीछे घूम कर देखता हैं। इसी प्रकार अब तक इतने दिनों तक हम  जो करते  आ रहें हैं  उससे मुझे क्या लाभ मिला या क्या हानि हुई इस पर विचार कर ,जहाँ  अपने व्यवहार में विचार में त्रुटि हो उसे सुधार लेना चाहिए। अपने परिवार का पालन करने के लिए यदि हम झूठ ,पाप ,हिंसा का सहारा नहीं लेते तो ईश्वर हमारा हर समय ध्यान रखता हैं ,वो हमे कभी भी अकेला नहीं पड़ने देता। 

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