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जीवन में भगवान की कितनी जरूरत है!

कितनी जरुरत है जीवन मे भगवान की 

जितना भीगता है मन ,उतना ही निर्मल हो जाता है . प्रख्यात साहित्यकार जॆनेन्द्र कुमार के जीवन का एक उदाहरण है -जीवन के आखिरी समय मे उन्हें लकवा मार गया था ,बोलना भी मुश्किल था . तब जो भी उन के पास आता ,उसे देखकर उनकी आखों मे आंसू गिर जाते इससे मालूम हो जाता कि पहचान लिया एक बार गले मे बहुत अधिक कफ जमा हो गया ,डॉक्टर ने कहा अब ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है बस अपने भगवान को याद करो . तब पहली बार उनको लगा कि जीवन मे भगवान की कितनी जरुरत है . उन्होंने अंतिम संस्मरण मे लिखा है -मैं णमोकार मन्त्र पढ़ता  जाता था और रोता जाता था . आधे घंटे तक मंत्र पढ़ते -२ खूब रोया . तब डॉक्टर दूसरी बार चेकअप  करने आए तो उन्हें पहले से काफी बेहतर पाया . डॉक्टर  ने नर्सो से पूछा इनको अभी कौन सी दवा दी गई है ,नर्सो ने कहा कोई दवा नहीं दी गई हैं आपने कहा था अपने ईश्वर को याद करो इन्होने वही किया है . 
जेनेंदर कुमार ने अपने संस्मरण मे लिखा है कि मुझे बार-बार यही लगता था कि जीवन भर ऐसे निर्मल मन से भगवान को याद क्यों नहीं किया अब मृत्यु के समय मैं अपने भगवान को याद कर रहा हूँ . तो मुझे अपने पुरे जीवन पर रोना आया और मन भीग गया .  

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जय श्री राधे

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