जब हमें क्रोध आए तो क्या करें कैसे बचें?

                    जब भी क्रोध आए तो हम क्या करें?

जब भी हमें क्रोध आए तो हमें 5 सूत्रों को याद रखना चाहिए -पहला सूत्र है सोचना  - क्योंकि जब हम क्रोध में होते हैं तो हम बिना सोचे समझे कुछ  भी बोल जाते हैं और हमें बाद में ग्लानि होती है कि हमने किन शब्दों का उच्चारण किया है ?पहले हम सोचते नहीं हैं और बाद में हमें पछताना पड़ता है।
इसलिए जब हमें क्रोध आए तो हमें अपने मन और जुबां पर नियंत्रण रखना चाहिए क्योंकि जब हमे क्रोध आता है तो क्रोध आने का कारण इतना बड़ा नहीं होता है  लेकिन जो हमारे अंदर  अहंकार है  वह उसे बड़ा बना देता है  । इसलिए  हमें अपने मन और अहंकार पर नियंत्रण रखना चाहिए ।अगर हम अपने अहंकार पर नियंत्रण रखेंगे तो हम जीवन के असली उद्देश्य को समझ पाएंगे कि हम धरती पर आए किसलिए है?
 दूसरा - हमें कितना भी क्रोध आए हमें अपने विचारों को दूसरों के समक्ष शांत भाव से रखना चाहिए ।
तीसरा - हमें जब क्रोध आ रहा हो तो हमें उस जगह से चले जाना चाहिए और पैदल सैर पर निकल जाना चाहिए क्योंकि इससे हमें सोचने का और आत्ममंथन करने का समय मिल  जाता है,और चौथा और सबसे महत्वपूर्ण सूत्र है - माफ कर देना, हमें दूसरों को माफ कर देना क्योंकि किसी को  भूल के लिए माफ कर देना  , हमारे  क्रोध को निष्क्रिय कर देता है ,क्योंकि क्रोध कभी नहीं चाहेगा कि दूसरों को क्षमा किया जाए क्योंकि क्रोध तो दूसरों को झुकाना चाहता है और  माफ कर देने से क्रोध की इच्छा विफल हो जाती है। इसलिए माफ करना सीखो, गलती किसी से भी हो सकती है । लेकिन हर एक को अपनी भूल सुधारने का एक मौका जरूर मिलना चाहिए । पांचवा सूत्र है हास्य ! किसी भी ऐसी बात को याद करना जिससे तुम्हें हंसी आ जाए क्योंकि हास्य बहुत सी समस्याओं को हल कर सकता है और तुमने अगर इन पांचों सूत्रों को अपना लिया , इन्हें आत्मसात कर लिया तो क्रोध भी तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।
।।ऊँ साँई।।

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