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आज का शुभ विचार

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                                                                          आज का शुभ विचार ईश्वर के संबंध में अनुभव उन्ही को होते हैं जो लोग सत्य , दया , क्षमा , अहिंसा , आदि सदगुणो  को धारण कर के संयमित जीवन बिताते हैं।      

परमार्थ क पत्र - पुष्प भाग 1

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                                                                                                 ( परमार्थ के पत्र - पुष्प) हम सब एक ही ईश्वर की संतान हैं। हमारे गुरुदेव पुज्य श्री मलूक पीठाधीश्वर  परम पूज्य श्री राजेन्द्र दासजी महाराज जी ने हमें एक पुस्तक दी, जिसमे हमारे दादा गुरु    श्री भक्ततमाली जी द्वारा  सत्संग  के कुछ   अंश  हैं जो मैं आपके समक्ष रख रही हूँ। जिसके द्वारा हमे जीवन में कई महत्व पूर्ण सन्देश मिलेंगे। हमारे दादा गुरु कहते हैं कि भारतीय जनता कर्म भूमि में जन्म पाकर धन्य- धन्य हो जाती हैं। हम लोग जंक्शन पर खड़े  हैं। सब और को जाने वाली गाड़ियाँ खड़ी हैं (ब्रह्म लोक , विष्णु लोक, साकेत वैकुण्ठ ,  रमावैकुंठ , गोलोक,शिवलोक , पितृलोक , नरक भी हैं। )जहाँ जाना चाहो  वहाँ ...

आज का शुभ विचार

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         यदि आप हिम्मत का पहला कदम आगे बढ़ाएंगे , तो परमात्मा की सम्पूर्ण मदद मिल जायेगी।

आज का शुभ विचार

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                                                                                    आज का शुभ विचार प रमात्मा गुणों के सागर हैं । यदि आप किसी विकार की अग्नि में जल रहे हैं ,तो उस  सागर में डुबकी लगाइये ।                                                                            ।।         ॐ गणपतये नमः ।।

शुभ नहीं अशुभ कार्यों को टालते रहो

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संस्कृत में एक सुक्ति हैं कि 'शुभस्य शीघ्रम् ,अशुभस्य  कलहरणम 'अथार्त्त  शुभ कार्य को जितना जल्दी हो सके कर डाले , लकिन अशुभ कार्य  को टालते रहे ।यदि हम तत्क्षण किसी की मदद करने के लिए आगे आ जाते हैं तो उसकी मदद हो जाती हैं और एक नेक काम भी ,लकिन वह क्षण बीत गया तो सम्भव हैं हम उस अच्छे कार्य को करने के लिए जीवित ही न रहे अथवा हमारे विचार ही बदल जाये।बहुत सारी बातें हो सकती हैं ,लकिन इतना निश्चित हैं कि यदि हम उस क्षण को चूक गए तो हम किसी नेक काम करने से वंचित रह जायेगे।हमने अपने जीवन में कई बार यह महसूस किया होगा की अक्सर अच्छे कार्य को करने का हम अवसर चूक जातें हैं।तो ठीक ही कहा हैं कि शुभस्य शीघ्रम् अथार्त् शुभ कार्य अथवा अच्छे कार्य को शीघ्र कर लेना चाहिए । अशुभस्य  कालहरणम् अथार्त्  अशुभ अथवा पाप कर्म के लिए शीघ्रता न करें ।अपितु समय निकल जाने दे ।सम्भव  हैं कालान्तर में कहीं से सदबुद्धि मिल जाये  और हम पाप कर्म करने से बच जाएँ ।आज इस विश्व में ऐसे अणु परमाणु बम मौजूद हैंकि  पूरी धरती नष्ट हो जाये पर कुछ लोगो की सदबुद्धि  की वजह से ...

व्यक्ति के व्यक्तित्व के प्रकार (type of personailty )

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     व्यक्ति में 6 प्रकार का व्यक्तित्व होता हैं । व्यक्तित्व षड्मुखी होता हैँ -अथार्त व्यक्ति की विचार धारा ६ प्रकार की होती हैं - १ -शास्त्रमुखी -जिस के अंतर्गत व्यक्ति शास्त्र के अनुसार ही कार्य करता हैं वह यह ध्यान रखता हैं कि शास्त्र में क्या उचित हैं ,क्या अनुचित। २ -गुरु मुखी-व्यक्ति गुरु के आधार पर ही कार्य करता हैं ।जो गुरु ने कह दिया उसी आज्ञा का पालन करता हैं। ३ -राजमुखी -इसमें व्यक्ति वाही कार्य करता हैं जो राजा कहे अथवा सत्ता कहे ।जिससे राजा खुश रहे। ४ -स्वमुखी -व्यक्ति अपनी चेतना से कार्य करता हैं।जो चेतना गुरु ने जगा दी ,उसी के अनुसार गुरु व शास्त्र को ध्यान में रखकर कार्य करता हैं । ५ -मनमुखी -जो मन में आयेगा वही कार्य करेगा ।वह न गुरु की परवाह करता हैं न शास्त्र की।जो उसकी मर्जी होती हैं वही कार्य करता हैं। ६ -गोमुखी -व्यक्ति हमेशा स्मरण करता रहता हैं और कार्य  करता रहता हैं।निरन्तर स्मरणशील रहता हैं।                             जय श्री राधे !

आज का शुभ विचार

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                                                आज का शुभ विचार                                   भागवत कथा सुनने से चार लाभ होते हैं - १-तृप्ति ,अथार्त् कुछ और न पाने की लालसा ।  २ -अपने प्रभु से प्रेम  । ३ -निष्काम भावना  । ४ -भक्त प्रेम अथार्त् जितने भी प्रभु भक्त हैं उन सबसे विशेष प्रेम ।