हम सभी का कल्याण इस बात में हैं कि ----

             हम सभी का कल्याण इस बात में हैं कि ----


हम लोगों का कल्याण इस बात में है कि हम संत भगवान की कृपा से हम निरंतर भगवान का स्मरण करें, उन्हें कभी ना भूले। गीता अध्याय 8 शलोक 14 में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन जो अनन्य भाव से लगातार मेरा स्मरण करता है मैं ऐसे योगी के लिए सुलभ हूं, भगवान के इस वाक्य पर जिसे विश्वास है वह सर्वत्र अपने प्रभु को मानता है। जागृत अवस्था में स्मरण संभव है, परंतु सोते समय स्मरण असंभव है, जागते हुए जो कार्य किया जाता है। प्राय: वही स्वप्न में दिखाई देता है। सोने के पहले स्मरण करते-करते सोना और जाकर स्मरण करना, इसके बीच का सोने का समय भी स्मरण में माना जाएगा। जीव के सच्चे सगे संबंधी भगवान ही हैं ईश्वर दयालू है कभी भी जीवो पर कुपित नहीं होते हैं।  जैसे गर्भ के समय बालक माता के पेट में हाथ पैर चलाता है माता को कष्ट होता है परंतु माता उस बालक पर कुपित नहीं होती है, इसी प्रकार प्रभु भी आस्तिक नास्तिक सभी जीवो के साथ रहते हैं। नरक में भी साथ नहीं छोड़ते हैं अंतर्यामी रूप से प्रभु सर्वत्र जीव के साथ रहते हैं अगर बालक कुएं में गिर पड़े तो उसकी माता जोर-जोर से रोकर पुकार करेगी लोगों से कहेगी कि बालक को कुएं से निकालो पर स्वय नहीं कूदेगी।भगवान ऐसे दयालु हैं कि अघासुर अजगर के मुख में जब सब ग्वाल बाल घुस गए तो भगवान उनकी रक्षा के लिए स्वयं भी अघासुर के मुंह में प्रविष्ट हो गए, ऐसे दयालु प्रभु आप सबों का सर्वदा मंगल करें।

 जय श्री राम जय घनश्याम 

दादा गुरु श्री गणेश दास जी भक्तमाली जी महाराज जी के श्री मुख से।

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