> परमात्मा और जीवन"ईश्वर के साथ हमारा संबंध: सरल ज्ञान और अनुभव: फ़रवरी 2026

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सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

क्या आप भी जीवन के कठिन दौर से गुजर रहे हैं? जानिए कैसे एक टूटा हुआ मन परमात्मा से जुड़ने का माध्यम बन सकता है और कैसे आप फिर से आंतरिक शांति पा सकते हैं।

 क्या आप भी जीवन के कठिन दौर से गुजर रहे हैं? जानिए कैसे एक टूटा हुआ मन परमात्मा से जुड़ने का माध्यम बन सकता है और कैसे आप फिर से आंतरिक शांति पा सकते हैं।

प्रस्तावना

​जीवन में कभी-कभी ऐसा मोड़ आता है जब हम भीतर से पूरी तरह बिखर जाते हैं। भरोसा टूटता है, सपने टूटते हैं और कभी-कभी खुद पर से विश्वास भी उठ जाता है। ऐसे में हमें किसी ऐसे सहारे की तलाश होती है जो बिना शर्त हमें स्वीकार करे। वह सहारा सिर्फ परमात्मा है। लेकिन सवाल यह है कि जब मन अशांत हो, तो उस परम शक्ति से संपर्क कैसे साधें ?

​1. शून्य को स्वीकार करें (Accept the Void)

​परमात्मा से जुड़ने की पहली सीढ़ी है अपनी स्थिति को स्वीकार करना। जब आप टूटते हैं, तो आपके भीतर का अहंकार (Ego) भी टूटता है। इस 'शून्य' को डर से नहीं, बल्कि समर्पण से भरें। ईश्वर से कहें, "मेरे पास अब कुछ नहीं बचा, अब जो है वो तू ही है।"

​2. मौन में संवाद (Conversation in Silence)

​परमात्मा शोर में नहीं, सन्नाटे में मिलता है। जब शब्द खत्म हो जाएं, तो बस शांत बैठें। अपनी तकलीफ को छुपाएं नहीं, बल्कि उसे प्रार्थना की तरह बहने दें। आंसू भी एक तरह की प्रार्थना हैं जिसे ईश्वर बखूबी समझता है।

​3. कृतज्ञता का अभ्यास (Practice Gratitude)

​टूटे हुए मन में अक्सर शिकायतें होती हैं। लेकिन जुड़ने का असली तरीका 'शुक्राना' है। उन छोटी चीजों के लिए धन्यवाद दें जो अभी भी आपके पास हैं—जैसे आपकी सांसें, प्रकृति या किसी का साथ। जब आप धन्यवाद देते हैं, तो आपकी ऊर्जा की आवृत्ति (Frequency) परमात्मा से मिलने लगती है।

​4. सेवा और सत्संग (Service and Connection)

​जब हम दूसरों के दुख को कम करने की कोशिश करते हैं, तो हमारा अपना दुख छोटा लगने लगता है। किसी जरूरतमंद की मदद करना साक्षात ईश्वर की सेवा है। साथ ही, सकारात्मक विचारों वाले लोगों (सत्संग) के बीच रहें ताकि आपकी नकारात्मकता दूर हो सके।

​5. समर्पण: "तेरा तुझको अर्पण"

​अक्सर हम चीजों को कंट्रोल करना चाहते हैं, और जब वे नहीं होती, तो मन टूट जाता है। परमात्मा से जुड़ने का सबसे सरल मंत्र है—समर्पण। यह मान लेना कि जो हो रहा है उसमें कोई बड़ी योजना छिपी है, मन को असीम शांति देता है।

​निष्कर्ष

​टूटा हुआ मन अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। यह संकेत है कि अब आपको अपनी शक्ति से नहीं, बल्कि उस 'महाशक्ति' के सहारे की जरूरत है। बस एक कदम बढ़ाएं, वह बाहें फैलाए आपका इंतजार कर रहा है।

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 ।।जय श्री राधे।।

रविवार, 1 फ़रवरी 2026

सच्ची भक्ति क्या है – माँगना या समर्पण करना?

क्या सच्ची भक्ति भगवान से माँगने में है या समर्पण करने में? जानिए भक्ति की गहराई और आत्मिक सत्य इस भावनात्मक लेख में।

🌼 सच्ची भक्ति क्या है – माँगना या समर्पण करना?

जब हम भगवान के सामने हाथ जोड़ते हैं,तो अक्सर हमारे मन में कोई न कोई इच्छा होती है —

स्वास्थ्य, शांति, समाधान, या किसी अपने की भलाई।

तब प्रश्न उठता है —क्या भगवान की भक्ति सिर्फ माँगने तक सीमित है? या सच्ची भक्ति समर्पण में छुपी होती है?

🌿 माँगना भी भक्ति है, पर शुरुआत मात्र

भगवान से माँगना गलत नहीं है। दुख में, टूटे मन से, जब हम उन्हें पुकारते हैं — तो वही हमारी पहली भक्ति होती है। 

माँगना यह दर्शाता है कि हमें विश्वास है कि कोई है जो सुनता है। लेकिन माँगने वाली भक्ति अक्सर शर्तों से जुड़ी होती है —

अगर यह मिल जाए, तो मैं मानूँ।”

🌸 समर्पण – जहाँ भक्ति परिपक्व होती है

समर्पण का अर्थ है — जो भी मिले, उसे स्वीकार करना। जब भक्त कहता है —

हे प्रभु, जो आप दें वही स्वीकार है”

तब भक्ति गहराई पकड़ लेती है। समर्पण में: अपेक्षा नहीं होती शिकायत कम हो जाती है और मन शांत रहने लगता है। यही वह अवस्था है जहाँ इंसान भगवान को बदलना नहीं, खुद को बदलना सीखता है।

🌼 माँगने से समर्पण तक की यात्रा

हर भक्त पहले माँगता है,फिर धीरे-धीरे समझता है।

दुख, प्रतीक्षा और अनुभव ,हमें सिखाते हैं कि भगवान हमेशा वही देते हैं जो हमारे लिए उचित होता है —

भले ही वह हमारी इच्छा के अनुसार न हो। यहीं से माँग समर्पण में बदलने लगती है।

🌺 सच्ची भक्ति का स्वरूप

सच्ची भक्ति न तो केवल माँगना है और न ही केवल चुप रह जाना।

👉 सच्ची भक्ति है —

भगवान से सब कहना, और फिर उन पर सब छोड़ देना।

जब मन यह कह सके — “मैंने आपको अपना सब सौंप दिया”

तब भक्ति पूर्ण होती है।

🌸 अंत में एक सत्य

अगर आज आप भगवान से कुछ माँग रहे हैं,तो स्वयं को दोषी मत समझिए ,और अगर आप समर्पण की ओर बढ़ रहे हैं, तो समझिए —आपकी भक्ति परिपक्व हो रही है। 

क्योंकि माँगना भक्ति की शुरुआत है, और समर्पण उसका शिखर। 🙏🌼

।।जय श्री राधे।।

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