परमात्मा की प्राप्ति के लिए निराश नहीं होना चाहिए

    ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय श्री जय दयाल जी गोयन्दका के श्री मुख से  परमात्मा की प्राप्ति के लिए निराश नहीं होना चाहिए



     ( ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय श्री जय दयाल जी गोयन्दका)
बहुत से भाई परमात्मा की प्राप्ति के लिए  यथा साध्य , साधन( पूजा,व्रत,नाम-जप,आदि) करते हैं पर बहुत समय तक साधन करने पर भी जब परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती ,तब निराश हो जाते हैं, पर वे सज्जन निराश ना होकर यदि परमात्मा की प्राप्ति ना होने का कारण जान जाए, तो उन्हें पता लगेगा कि श्रद्धा प्रेम तथा आदर पूर्वक और तत्परता के साथ साधना करना ही इसमें प्रधान कारण है। जिस प्रकार लोभी मनुष्य धन की प्राप्ति के लिए पूरी तत्परता के साथ साधन करता है ,अपना सारा समय समस्त बुद्धि कौशल धन की प्राप्ति के प्राप्ति में ही लगाता है तथा नित्य सावधानी के साथ कोई ऐसा भी काम नहीं करता जिससे धन की तनिक भी क्षति हो ,इसी प्रकार यदि श्रद्धा, प्रेम तथा आदर के साथ पूर्ण तत्परता से साधन किया जाए, तो इस युग में परमात्मा की प्राप्ति बहुत शीघ्र हो सकती है। आत्मा के उद्धार या परमात्मा की प्राप्ति में अब तक जो विलंब हुआ उसे देखकर कभी निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि भगवान के विविध आश्वासनों पर ध्यान देकर विशेष रूप से साधन में प्रवृत्त होना चाहिए। भगवान ने कहा है कि यदि मरते समय भी मनुष्य मुझे स्मरण कर ले, तो उसे मेरी प्राप्ति हो सकती है।-
 जो पुरुष अंत काल में भी भगवान को ही  ध्यान करता हुआ शरीर को त्याग कर जाता है। वह मेरे साथ रूप को प्राप्त कर लेता है, इसमें कुछ भी संशय नहीं। (गीता8/5)



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