लघु गीता अध्याय 4

                         लघु गीता अध्याय 4


भगवान कृष्ण ने कहा कि कई बार मैंने धर्म स्थापना हेतु और पापियों के नाश करने के लिए जन्म लिए, ताकि साधुओं की रक्षा हो सके।

 जो मनुष्य जन्म-मरण के तत्व को समझ लेता है और मोह,भय, क्रोध को त्याग कर मेरी शरण मे आता है उसे मोक्ष मिल जाता है।

इस संसार में मनुष्य जिस भावना से, जिस देवता की भक्ति करता है वह ईश्वर की ही भक्ति है और शीघ्र फल प्राप्त होता है। जो लोग द्रव्य यज्ञ, तप यज्ञ, स्वाध्याय यज्ञ, व ज्ञान यज्ञ व आहार कम करके रहते हैं वह सब  यज्ञवेत्ता है व इन सब यज्ञों से सब पाप नष्ट हो जाते हैं और जो यज्ञ नहीं करते उन्हें लोक व परलोक दोनों प्राप्त नहीं होते।

ज्ञान यज्ञ सबसे उत्तम है। श्रद्धा रहित व मन में संदेह बना रहा ऐसे लोग नरक को ही जाते हैं। इसलिए ज्ञान से अपने संदेह को मिटाकर कर्म को करना ही  मोक्ष दिला सकता है।


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