भक्ति प्राप्ति के आठ सरल साधन


भक्ति प्राप्ति के आठ सरल साधन 

१. स्वभाव में सरलता। मन से कुटिलता का हटाना। दूसरे का अनिष्ट करके अपने स्वार्थ की सिद्धि मन की कुटिलता हैं। 
२.जो कुछ भगवान ने घर ,परिवार दिया हैं उसमे संतुष्ट रहना। अनुचित उपायों से संसारी वस्तु को करने  की इच्छा न करना संतुष्ट रहना। 
३.भगवान का दास कहला कर दूसरे धनी मानियों  की आशा व चापलूसी नहीं करना। 
४. अकारण किसी से वैर विग्रह न करना। 
५.सत्संग से प्रेम ,संसारी लोगो से घनिष्ठता न रखकर प्रयोजन भर का संबंध रखना। . 
६.भक्ति की श्रेष्ठता को मानना ,दुष्ट से तर्क न करना। 
७.स्वर्ग मोक्ष के सुखों की भी  इच्छा न करना। 
८.भगवत् गुणानुवाद का गान  करना। 

इन उपदेशो को श्री राम ने दिया। सभी संत भी यही कहते हैं। एक एक  बात को ध्यान में लाकर उस पर विचार करना ,फिर उस पर दृढ निश्चय करना। इसलिए थोड़ा ही सही जितना भी समय मिले मन में पूजा व लीला चिंतन अवश्य करना चाहिए। 

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