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 भागवत धर्म केसे अपनाये

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                         भागवत धर्म को अपनाने के लिए क्या करे ! जहाँ -जहाँ भगवान ने भगवत प्राप्ति के लिए अपने श्री मुख से जो भी उपाय बताये हैं ,उन्ही का नाम हैं भागवत धर्म । भागवत धर्म माने भगवान की भक्ति ।ये ऐसा सरल मार्ग हैं कि  इस पर कमजोर से कमजोर ,अनपढ़ से अनपढ़  आदमी आँख मुंद कर चल पड़ेगा तो गिरेगा नहीं और वो रास्ता भी नहीं भूलेगा ।वो भटकने वाला नहीं हैं ।गो स्वामीजी कहते हैं - तुलसी सीताराम भजु दृढ़ राखहु विश्वास । कबहुं  बिगड़त न सुने श्री रामचन्द्र के दास ।। इसमें कुछ विशेष नहीं करना पड़ता ।जो कुछ आप करते रहे हो वो सब आप कर सकते हो ।खाना -पीना ,बाल -बच्चे ,घर ,मकान । लेकिन यह समझ करके कि यह प्रभु का काम हैं और प्रभु के लिए हैं ।मैं जो कुछ कर रहा हूँ अपने प्रभु के लिए कर रहा हूँ ।उनकी प्रसन्नता के लिए कर रहा हूँ । भगवान के अतिरिक्त कही भी मन इधर -उधर ले जाएगा ,भटकायेगा तो उसे भय होगा ,गिरने का डर रहेगा ।भगवान की भक्ति करने वाला ,भगवत धर्म का पालन करने वाला प्रभु के नाम ,रूप ,गुण ,ल...

जीवन में परम कल्याण कैसे हो ?

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  जीवन में परम कल्याण कैसे       हो ? एक बार श्री कबीरजी  रोने लगे और उनके पुत्र श्री कमालजी  हंसने लग गए ।कबीर जी ने पूछा -बेटा तू हँस क्यों रहा हैं ? कमालजी  बोले -पिताजी ! पहले आप बताइए  कि  आप रो क्यों रहे हैं ? कबीर जी बोले -   चलती चक्की देख के दिया कबीरा रोय । दो पाटन  के बीच में ,साबुत बचा न कोय।। एक चक्की चल रही  हैं ,और इसमें जो भी पड़ा वो पिस  गया ,यही देख कर रोना आया ।कमाल बोलें -   (वही)    चलती चक्की देख कर हँसा  कमाल ठठाय ।  कील सहारे जो रहे ,सो कैसे पिस  जाए ।। चक्की के दो पाट  होते हैं और ऊपर  वाला पाट  उठाकर  देखे तो बीच वाली  मोटी     कील के चार- छः अंगुल इर्द -गिर्द वाला अनाज सुरक्षित रहता हैं ।इन दोनों का भाव गोस्वामी श्री तुलसीदास जी ने एक दोहे में बताया -   माया चक्की कीलहरि,जीव चराचर नाज।  तुलसी जो उबरो चहे ,कील  शरण को भाज ।। माया की चक्की हैं ।माया की चक्की रूपी दो पा...

महाभारत की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां

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                  महाभारत की महत्वपूर्ण जानकारियां                पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं - 1. युधिष्ठिर 2. भीम 3. अर्जुन 4. नकुल। 5. सहदेव ( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है ) यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी । वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र….. कौरव कहलाए जिनके नाम हैं - 1. दुर्योधन 2. दुःशासन 3. दुःसह 4. दुःशल 5. जलसंघ 6. सम 7. सह 8. विंद 9. अनुविंद 10. दुर्धर्ष 11. सुबाहु। 12. दुषप्रधर्षण 13. दुर्मर्षण। 14. दुर्मुख 15. दुष्कर्ण 16. विकर्ण 17. शल 18. सत्वान 19. सुलोचन 20. चित्र 21. उपचित्र 22. चित्राक्ष 23. चारुचित्र 24. शरासन 25. दुर्मद। 26. दुर्विगाह 27. विवित्सु 28. विकटानन्द 29. ऊर्णनाभ 30. सुनाभ 31. न...
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                           मन में दो विचार क्यों आते हैं और किसकी सुने ? अक्सर आपने देखा होगा कि हमारे मन में दो तरह के विचार आते हैं ,एक नकारात्मक और एक सकारात्मक ,हम इस दुविधा में रहते हैं कि किसकी सुने या फिर यह दो तरह के क्यों विचार आ रहे हैं ।मेने कही सुना था कि हम सभी के मन में दो तरह के विचार रमण करते हैं ,यह हम पर निर्भर करता हैं कि हम किसको परोषित करते हैं ,या किसको अधिक  महत्व देते हैं ।यदि आप दुविचारो को अधिक महत्व देने लगोगे तो इस तरह कि विचारधारा आप पर हावी होने लगेगी व् आपके अंदर की सुविचार धारा धीरे -धीरे अपना दम तोड़ देगी और मृत हो जाएगी ।यह कही हद तक इस बात पर निर्भर करता हैं कि हमने किसी संत या सदगुरू का आश्रय लिया हैं या नहीं।हम जितना अपने ईश्वर के नजदीक होते जाएंगे या सदगुरू के सानिध्य में आ जाएगे हमारी विचारधारा उतनी ही सकारात्मक होती चली जाएगी ।हमारे मन में कितने ही नकारात्मक विचार आ जाए वह हम पर हावी नही हो सकते ।हमारे ईश्वर के प्रति आस्था जेसे जेसे बढ़ती जाएगी ,हमारी सोच उतनी ही सकार...

gopi chadan

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गोपी चंदन क्या है ? गोपी तिलक क्यो लगाया जाता है ? कौनसे भक्त गोपी तिलक करते है? यु तो हम सभी ने देखा है कि सभी भक्त अपने माथे पर अलग अलग प्रकार के तिलक करते है| कोई लाल तिलक करता है तो कोई मिट्टी के रंग का तिलक करता है |और उनका लगाने का प्रकार भी सभी परम्पराओं मे भिन्न भिन्न प्रकार का होता है| जो भक्त भगवान श्री कृृष्ण को मानते है और वैष्णव सनातन धर्म पर चलते है | वे भक्त सदैव अपने मस्तक पर गोपीचंदन के तिलक का उपयोग करते है| गोपी तिलक क्यो किया जाता है ? एक तो अगर हम संसारिक दृष्टिकोण से देखेगे तो ,उसे हम ऐसे देख सकते है, कि जिस प्रकार हर देश का अपनी अपनी एक पहचान होती है, अर्थात उनके झंडे के रुप में| जैसे हम अगर किसी क झंडा दिखायेगे तो सामने वाला व्यक्ति समझ जायेगा कि हम भारत से है| ऐसे ही जब कोई भक्त वैष्णव परम्परा ग्रहण करता है तो गोपी तिलक करता है | या दुसरे उदारण से हम इसे ऐसे समझ सकते है , कि जैसे हर एक स्कुल की अपनी एक अलग युनिर्फाम होती है | जिसे हमे पता चलता है कि ये बच्चा किस स्कुल का है| बस इसी प्रकार गोपीचंदन का तिलक भी...

देवराहा बाबा के अमृत वचन सेवा,सहानुभूति और उदारता

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   देवराहा बाबा के अमृत वचन सेवा,सहानुभूति और उदारता                            (ब्रह्मलीन योगिराज श्रीदेवराहा बाबाजी के अमृत वचन )         प्रेम ही सृष्टि हैं , सबके प्रति प्रेम भाव रखो।                 भूखो को रोटी देने में और दुखियों के आसूं पोछने में जितना पुण्य लाभ होता हैं और , उतना वर्षो के जप तप भी नहीं होता।         परमात्मा  पृथक कुछ भी नहीं हैं। यह सर्व्यापक ईश्वर प्रकृति के कण -कण  व्याप्त हैं। अतः चराचर को भगवत स्वरूप मानकर सबकी सेवा करो।         गीता का सार हैं , दुखी को सांत्वना तथा कष्ट में सहायता देना एवं उन्हें दुःख भय  से मुक्त करना।          आत्मचिंतन , दैन्य -भाव और सदगुरु  की सेवा इन तीनो बातों को कभी मत भूलो।         प्रतिदिन  यथासाध्य कुछ- न -कुछ दान अवश्य करों ,इससे त्याग की प्रवृ...

राम रक्षा स्तोत्र हिदी में

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         प्रभु हमारी हर संकट से रक्षा करें एक मात्र केवल और केवल उन्ही का सहारा हैं                        राम रक्षा स्तोत्र हिदी में                                  आज मैं आप सबके सामने एक ऐसे स्तोत्र के रखना चाहती हूँ, जिसके महत्व की जानकारी  मेने जाने कितनी बार विभिन्न पत्रिकाओ में एवं ,गुरु जी के .श्री मुख से सुनी हैं। बहुत से लोगो ने अपने साथ होने वाले आश्चर्यजनक अनुभव के बारे में भी बताया हैं जो कि बिलकुल सत्य थी। बल्कि मैंने स्वंय महसूस किया  कि अगर इस  पाठ को पूरी निष्ठा के साथ किया जाए  तो यह चमत्कार दिखलाता हैं। किसी को भी जब कोई समस्या का समाधान न मिल रहा हो तो एक बार जरूर विश्वास के साथ इस पाठ  को करें, अवश्य ही लाभ होगा।  यह मैं हिंदी में ही करने की सलाह दूँगी , ताकि कोई गलती न हो। पाठ इस  प्रकार हैं -              ...