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चाहे मन लगे या न लगे, यदि भगवान्‌का नाम जीभसे निरन्तर लेने लग जाइयेगा

                                    ॥ श्री हरिः ॥ जीभ से निरन्तर भगवान्‌ का नाम लीजिये — भगवान्ने कहा है—‘सभी धर्मोका आश्रय छोड़कर केवल एकमात्र मेरी शरणमें चले आओ। फिर मैं तुम्हें सब पापोंसे मुक्त कर दूँगा, तुम चिन्ता मत करो।'  सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज । अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा  शुचः ॥  (गीता १८ । ६६  ) जरूर पढ़े– https://www.parmatmaaurjivan.co.in/2022/02/blog-post.html मनकी कैसी भी अवस्था क्यों न हो, कोई परवाह नहीं । केवल जीभसे निरन्तर भगवान्‌का नाम लीजिये, फिर सारी जिम्मेवारी भगवान् सँभाल लेंगे। केवल जीभसे नाम - स्मरण, और कोई शर्त नहीं ।  चाहे मन लगे या न लगे, यदि भगवान्‌ का नाम जीभ से निरन्तर लेने लग जाइयेगा तो फिर न तो कोई शंका उठेगी, न कोई चाह रहेगी । थोड़े ही दिनों में शान्ति का अनुभव करने लगियेगा। इससे सरल उपाय कोई नहीं है । पूर्व के पापों के कारण नाम लेने की इच्छा नहीं होती । यदि एक बार हठसे निरन्तर नाम लेकर नियम लेकर ४-६ महीने बैठ जाय...

जब मन दुखी हो तो क्या करें?

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                            जब मन दुखी हो तो क्या करें? जब मन दुखी होता है, तो कई तरह की चीजें करके आप अपने मन को शांत कर सकते हैं। यहां कुछ सुझाव हैं जो आपको मदद कर सकते हैं: अपने भावनाओं को व्यक्त करें: वक्त निकालें और अपनी भावनाओं को लिखें, चित्र बनाएं, या दूसरों के साथ बातचीत करें। अपनी मन की स्थिति को साझा करने से आपको राहत मिल सकती है और आपका दुख कम हो सकता है। व्यायाम करें: शारीरिक गतिविधि और व्यायाम आपके मन को स्थिरता देने में मदद कर सकते हैं। योग, प्राणायाम, या किसी अन्य व्यायाम तकनीक का अभ्यास करना आपके मानसिक स्थिति को सुधार सकता है। संगीत सुनें: संगीत आपके मन को शांति और आनंद प्रदान कर सकता है। आपकी पसंद के गाने सुनें या स्वयं गायें, जो आपको खुशी महसूस कराते हैं। मनोरंजन करें: किसी अपने पसंदीदा गतिविधि में समय बिताएं, जैसे कि किताब पढ़ना, फिल्म देखना, कला या शौक के साथ समय बिताना। यह आपको मनोरंजन का मौका देता है और दुख को भुलाने में मदद कर सकता है। समय के साथ दुख को स्वीकार करें: दुख भाग्य का हिस्सा है और ...

कैलाश पर्वत और चंद्रमा का रहस्य.....

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                    कैलाश पर्वत और चंद्रमा का रहस्य..... कैलाश पर्वत एक अनसुलझा रहस्य, कैलाश पर्वत के इन रहस्यों से नासा भी हो चुका है चकित.. कैलाश पर्वत, इस एतिहासिक पर्वत को आज तक हम सनातनी भारतीय लोग शिव का निवास स्थान मानते हैं। शास्त्रों में भी यही लिखा है कि कैलाश पर शिव का वास है। किन्तु वहीं नासा जैसी वैज्ञानिक संस्था के लिए कैलाश एक रहस्यमयी जगह है। नासा के साथ-साथ कई रूसी वैज्ञानिकों ने कैलाश पर्वत पर अपनी रिपोर्ट दी है। उन सभी का मानना है कि कैलाश वास्तव में कई अलौकिक शक्तियों का केंद्र है। विज्ञान यह दावा तो नहीं करता है कि यहाँ शिव देखे गये हैं किन्तु यह सभी मानते हैं कि, यहाँ पर कई पवित्र शक्तियां जरूर काम कर रही हैं। तो आइये आज हम आपको कैलाश पर्वत से जुड़े हुए कुछ रहस्य बताते हैं। कैलाश पर्वत के रहस्य. रहस्य 1– रूस के वैज्ञानिको का ऐसा मानना है कि, कैलाश पर्वत आकाश और धरती के साथ इस तरह से केंद्र में है जहाँ पर चारों दिशाएँ मिल रही हैं। वहीं रूसी विज्ञान का दावा है कि यह स्थान एक्सिस मुंडी है और इसी स्थान पर व्यक्ति अलौकिक...

परमार्थ के पत्र पुष्प (हृदय अशांत रहेगा)

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           परमार्थ के पत्र पुष्प ( हृदय अशांत रहेगा) अपने मन में सबके प्रति सद्भाव बनाए रखना चाहिए। दूसरे लोग मेरे प्रति ईर्ष्या द्वेष रखें, तो उससे हमारा कुछ भी ना बिगड़ेगा। ईर्ष्या क्रोध जिसके मन में है, उसी की हानि होगी। हृदय अशांत हो जाएगा। क्रोध ईर्ष्या से हृदय का रोग भी पैदा हो जाता है। मन शांत रहने से शरीर स्वस्थ रहेगा। शांत रहकर दूसरे को शांत रख सकेंगे। हम क्रोध करेंगे तो दूसरे को भी क्रोध की प्रेरणा मिलेगी। सभी जीव ईश्वर के अंश है। इसलिए सब के प्रति सद्भाव बना कर रखना चाहिए।इसी से प्रभु प्रसन्न होंगे, यही सच्ची भक्ति है। बिना कारण के उपकार करने वाले दो हैं –1.ईश्वर और 2.भक्त। शेष सब स्वार्थी हैं। ।।दादा गुरु के श्री मुख से।।

परमार्थ के पत्र पुष्प(जो लोग भगवान में अपने मन को लगाते है

          जो लोग अपने मन को भगवान में लगाते हैं। जो लोग अपने मन को भगवान में लगाते हैं, वाणी से नाम गुणों का कीर्तन करते हैं। शरीर से मंदिर में सेवा करते हैं, वह भाग्यशाली हैं। इन्हीं कामों को प्रेम पूर्वक करते-करते भगवान के रूपों का, हृदय में साक्षात्कार कर लेते हैं। संसार में प्राणी निरंतर सुखी नहीं रह सकता है कभी सुख, कभी दुख प्रारब्ध के अनुसार मिलते हैं। इनसे घबराना नहीं चाहिए। सच्चाई के साथ व्यवहार करते हुए किसी का बुरा नहीं सोचना चाहिए। अपने साथ बुराई करने वाले को भी सज्जन शाप नहीं देते हैं। ऐसे परोपकारी पर भगवान प्रसन्न होते हैं। कष्ट के समय भक्तों की परीक्षा होती है, परीक्षा समझकर बुद्धि को स्थिर करना चाहिए। इतिहास देखने से पता चलता है कि बड़े-बड़े भक्तों को अवतार काल में परमात्मा को कष्ट सहन करते देखा जाता है। काल में भी अपने धर्म का त्याग करके जो उपकार करता है वही धन्य है। दादा गुरु भक्तमाली श्री गणेशदास जी के श्री मुख से

श्रीमद् भागवत का सूक्ष्म रूप

                      श्रीमद् भागवत का सूक्ष्म रूप                             मूल भागवत हिंदी में                             ॐ श्री परमात्मने नमः  श्री भगवान बोले– ब्रह्मा जी! मेरा जो अत्यंत गोपनीय विज्ञान सहित ज्ञान है, वह तथा रहस्य सहित उसके अंग मेरे द्वारा कहे गए हैं, उसको तुम ग्रहण करो, धारण करो।  मैं जितना हूं, जिन जिन भाव वाला हूं, जिन जिन रूपों, गुणों और कर्मों वाला हूं, उस मेरे सभी रूप के तत्व का यथार्थ अनुभव तुम्हें मेरी कृपा से ज्यों का त्यों हो जाए। सृष्टि से पहले भी मैं था, मेरे सिवा और कुछ भी नहीं था और सृष्टि उत्पन्न होने के बाद जो कुछ भी यह संसार दिखता है, वह भी मैं ही हूं। सत् (चेतन,अविनाशी), असत (नाशवान) तथा सत व असत से परे जो कुछ कल्पना की जा सकती है, वह भी मैं ही हूं।सृष्टि के सिवाय जो कुछ है वह मैं ही हूं और सृष्टि का नाश होने पर जो शेष है वह भी मैं ही हूं।  ...

पंचामृत जीवन में एक बार इसको अपना लो फिर सुख ही सुख है

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  पंचामृत जीवन में एक बार इसको अपना लो फिर जीवन में सुख ही सुख है। 1  हम भगवान के ही हैं 2  हम जहां भी रहते हैं भगवान के ही दरबार में रहते हैं। 3  हम जो भी शुभ काम करते हैं भगवान का ही काम करते हैं। 4  शुद्ध सात्विक जो भी पाते हैं भगवान का ही प्रसाद पाते हैं। 5  भगवान के दिए प्रसाद से, भगवान के ही जनों की सेवा करते हैं।