संदेश

लघु गीता अध्याय 3

                                      लघु गीता                          अध्याय 3 कर्मों को प्रारंभ न करने से कोई निष्काम नहीं हो सकता और कर्म त्याग से न कोई संन्यासी हैं और न कोई सिद्धि प्राप्त कर सकता है। प्रकृति के गुण सब मनुष्यों को कुछ न कुछ कर्म करवातें है।इसलिए मन ,बुद्धि व कर्म इंद्रियों को वश में करके अपने नियमित काम को करते रहना ही करम यज्ञ है। व फल की इच्छा ना करना ही संन्यास है और इसी तरह वश में करके प्रभु चिंतन करना चाहिए और यदि मन, बुद्धि, और ज्ञान इंद्रियां चिंतन करते समय वश में ना हो और विषयों का चिंतन करता है, वह पापी, मिथ्याचारी कहलाता है।            सृष्टि के आरम्भ में ब्रह्मा जी ने यज्ञ सहित उत्पन्न करके कहा कि यज्ञ से ही बुद्धि,सुख और कल्याण को प्राप्त होंगे। जो स्वयं सामग्री भोग से पहले, इस का भाग, दान आदि नहीं करता है। वह पापी और देवताओं का चोर है।        राज...

लघु गीता: श्रीमद्भगवद्गीता का संक्षिप्त और सारगर्भित ज्ञान"

चित्र
                        लघु गीता: श्रीमद्भगवद्गीता का संक्षिप्त और सारगर्भित ज्ञान" लघु गीता – भगवद गीता का सार हिंदी में | Geeta Saar in Hindi श्रीमद्भगवद्गीता का सार संक्षेप में पढ़ें। लघु गीता के माध्यम से जानिए जीवन, कर्म, भक्ति और आत्मा का शाश्वत ज्ञान, सरल और सुंदर भाषा में। लघु गीता – जीवन का सार, श्रीकृष्ण के श्रीमुख से श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, यह जीवन का मार्गदर्शक है। इसमें अर्जुन और श्रीकृष्ण के संवाद के माध्यम से जीवन, धर्म, आत्मा और कर्म का ऐसा ज्ञान दिया गया है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है। 🌿 क्यों पढ़ें 'लघु गीता'? समय की कमी या सरलता की चाह रखने वालों के लिए लघु गीता में भगवद्गीता का सार संक्षेप में दिया जाता है, जिससे हम जीवन के मूल तत्वों को आसानी से समझ सकें। ✨ लघु गीता (सरल रूप) अध्याय 1 हे भगवान जो अर्जुन को ज्ञान दिया वह ज्ञान मुझे भी मिले, मैं आपकी शरण में आया हूं।जब कौरव व पांडव युद्ध करने के लिए कुरुक्षेत्र गए तब धृतराष्ट्र ने हस्तिनापुर में ही युद्ध देखने का संजय से ...

रक्षा बंधन : भाई-बहन का प्रेम व धार्मिक महत्व

चित्र
रक्षा बंधन : भाई-बहन के प्रेम का पर्व और इसका आध्यात्मिक महत्व       रक्षा बंधन 2025: भाई-बहन का प्रेम व धार्मिक महत्व भाई-बहन के रिश्ते का सबसे प्यारा और पवित्र पर्व है रक्षाबंधन। यह सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि स्नेह, विश्वास और सुरक्षा का वादा है, जो बहन अपने भाई की कलाई पर बांधती है।  रक्षा बंधन , इसका पौराणिक महत्व, पूजा विधि व आध्यात्मिक संदेश – जानिए इस त्योहार का सम्पूर्ण अर्थ। रक्षा बंधन का महत्व और इसकी आध्यात्मिक भावना हर वर्ष श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षा बंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और रक्षा-संवेदनाओं का प्रतीक पर्व है। यह केवल एक रक्षासूत्र बांधने का आयोजन नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संदेश देने वाला त्यौहार है। 🪻 रक्षा बंधन में  शुभ मुहूर्त में राखी बांधने से जीवन में प्रेम, सौहार्द और सुरक्षा का भाव प्रबल होता है। 🌼 रक्षा बंधन का पौराणिक आधार श्रीकृष्ण और द्रौपदी कथा: जब श्रीकृष्ण के हाथ में चोट लगी, द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा बांधा। कृष्ण ने उसे ‘रक्षा’ का वचन दिया। यही रक्षाबंधन का आध्यात्मिक बीज है।...

सावन में भगवान भोलेनाथ (शिवजी) की पूजा विशेष रूप से क्यों की जाती है,

चित्र
  सावन में भगवान भोलेनाथ (शिवजी) की पूजा विशेष रूप से क्यों की जाती है।  इसके पीछे धार्मिक, पौराणिक और प्राकृतिक तीनों दृष्टिकोणों से गहरे कारण हैं: 1. पौराणिक कारण : समुद्र मंथन और विषपान : पुराणों के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब "हलाहल विष" निकला तो पूरी सृष्टि संकट में पड़ गई। भगवान शिव ने करुणा दिखाते हुए वह विष पी लिया। यह घटना सावन मास में ही हुई थी। विष के प्रभाव से भगवान शिव का शरीर जलने लगा, और देवताओं ने उन्हें शांत रखने के लिए गंगाजल चढ़ाया और बिल्वपत्र अर्पित किए। तभी से सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक और बिल्वपत्र चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। 2. भगवान शिव और पार्वती का विवाह मान्यता है कि देवी पार्वती ने सावन मास में ही कठोर तप कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इसलिए सावन को शिव-पार्वती के मिलन का प्रतीक भी माना जाता है। इस कारण महिलाएं शिवजी की पूजा कर अपने पति के दीर्घायु व सौभाग्य की कामना करती हैं, और कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत करती हैं। 3. प्राकृतिक कारण : सावन मास वर्षा ऋतु का समय है। यह समय शरीर और मन को शुद्ध करने का ह...

शिव चालीसा

चित्र
                             शिव चालीसा (श्री शिव जी की चालीसा — श्री हनुमान चालीसा की तरह, भगवान शिव की स्तुति में रचित 40 चौपाइयों की एक भक्ति रचना) ॥दोहा॥ श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्या दास तुम, देहु अभय वरदान॥ ॥चौपाई॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्या दास तुम, देहु अभय वरदान॥ जय गिरिजा पति दीनदयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥ अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥ मैनाक पर्वत परम सुहावन। ध्यान करत मुनि ध्यान लगावन॥ काल कूट विष कण्ठ सम्हारे। सो नाथ तुम्हारे कौन उपारे॥ अंधक नायक अहि असुर संहारे। सुरन सिद्ध सेवक तुम्हारे॥ नन्दी ब्रह्मा आदि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ जैमिनी व्यास आदि ऋषिगण। तप करत ध्यानवत नित-नित॥ रामचन्द्र के काज सवारे। लक्ष्मण मुर्छित प्राण उबारे॥ रावण मर्दन कीन्हा भारी। पुत्र विभीषण राज दिलाई॥ मत्त भाल एक दानव मारा। त्रि...

ramraksha stotra

चित्र
                    राम रक्षा स्तोत्र        राम रक्षा स्तोत्र (हिंदी में अर्थ सहित) यह रहा राम रक्षा स्तोत्र का हिंदी में अर्थ — श्लोक के बाद सरल हिंदी अनुवाद दिया गया है: राम रक्षा स्तोत्र (हिंदी में अर्थ सहित) 1. ॐ श्रीरामं रमणं मेणि रामं रम्यं भजे सदा। रामेणाभिहितं स्तोत्रं रामरक्षा शुभप्रदम्॥ अर्थ: मैं सुंदर, मनोहर भगवान श्रीराम का सदा भजन करता हूँ। भगवान राम द्वारा कहा गया यह राम रक्षा स्तोत्र शुभफल देने वाला है। 2. ध्यानम् – ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढसीता मुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलं रामचन्द्रम्॥ अर्थ: भगवान राम को ध्यान कीजिए जिनकी भुजाएं घुटनों तक हैं, जो धनुष-बाण धारण किए हैं, पद्मासन में विराजमान हैं, पीत वस्त्र पहने हैं, जिनकी आँखें कमल के समान हैं, जो प्रसन्न हैं, जिनके बाएँ भाग में माता सीता विराजमान हैं, जिनका रंग नीले मेघ के समान है, जिनका शरीर अनेक आभूषणों से शोभायमान है और सिर प...

ramraksha stotra in sankrit

चित्र
  राम रक्षा स्तोत्र एक शक्तिशाली संस्कृत स्तोत्र राम रक्षा स्तोत्र एक शक्तिशाली संस्कृत स्तोत्र है, जिसकी रचना महर्षि बुद्धकौशिक ने की थी। यह स्तोत्र भगवान श्रीराम की कृपा और रक्षा प्राप्त करने के लिए पाठ किया जाता है। इसे श्रद्धा से प्रतिदिन पाठ करने से भय, रोग, बाधा, भयभीत करने वाली शक्तियाँ तथा नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती हैं।  रामरक्षा स्तोत्र (पूर्ण पाठ)  श्री गणेशाय नमः। अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य बुद्धकौशिक ऋषिः। श्रीसीता रामचन्द्रो देवता। अनुष्टुप् छन्दः। सीता शक्तिः। श्रीमद्हनुमान कीलकम्। श्रीरामचन्द्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः॥ १. ॐ श्रीरामं रमणं मेणि रामं रम्यं भजे सदा। रामेणाभिहितं स्तोत्रं रामरक्षा शुभप्रदम्॥ २. ध्यानम् – ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढसीता मुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलं रामचन्द्रम्॥ ३. चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम्। एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्॥ ४. ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीव...