शिव स्तुति-1(विनय पत्रिका)

                            शिव स्तुति-1


भगवान शिव जी को छोड़कर और किससे याचना की जाय? आप दीनों पर दया करने वाले, भक्तों के कष्ट हरने वाले और सब प्रकार से समर्थ ईश्वर है। समुंद्र मंथन के समय जब कालकूट विष की ज्वाला से सब देवता और राक्षस जल उठे, तब आप अपने दीनों पर दया करने के प्रण की रक्षा के लिए तुरंत उसको पी गए। जब दारुण दानव त्रिपुरासुर जगत को बहुत दुख देने लगा, तब आपने उसको एक ही बाण से मार डाला। जिस परम गति को संत महात्मा, वेद और पुराण महान मुनियों के लिए भी दुर्लभ बताते हैं। हे सदाशिव! वही परम गति काशी में मरने पर आप सभी को समान भाव से देते हैं। हे पार्वती पति! हे परम सुजान! सेवा करने पर आप सहज में ही प्राप्त हो जाते हैं। आप कल्पवृक्ष के समान मुंह मांगा फल देने वाले उदार हैं। आप कामदेव के शत्रु हैं। अतः हे कृपा निधान! तुलसीदास को श्री राम के चरणों की प्रीति दीजिये।।

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