क्रोध करने से अपने आप को कैसे रोकें

                             क्रोध करने से बचे
                                    अक्रोध

प्रभु कृपा से बुद्धि शुद्ध सात्विक रहे। परस्पर प्रेम बनाए रहें। किसी से कोई भूल हो तो उसे क्षमा करें। हम जानते हैं कि यह थोड़ा मुश्किल है, पर असम्भव नहीं, जिस पर भी क्रोध आ रहा है, उसके पास से कुछ समय के लिए दूर हो जाए, एक लम्बी  गहरी साँस ले, फिर अपने आप को समझा दे, क्रोध ना करें। जिसके ऊपर क्रोध किया जाता है, उसकी हानि नहीं होती है । जो क्रोध करता है उसी का रक्त जलता है। क्रोध करने से बुद्धि का नाश होता है ।विकास की गति मंद हो जाती है। क्रोध से हिंसा के और बदला लेने के भावों का उदय होता है। भाव से कर्म बनता है,कर्म को भोगने के लिए और फिर जन्म । बार-बार जन्म मरण होता है। जन्म लेना है, सत्संग भजन के लिए , बदला चुकाने के लिए नहीं। इसलिए शांत रहे। जब आप भजन कीर्तन में रम जाएंगे तो धीरे - धीरे मन शांत होने लगेगा, बस कोशिश करो कि हमेशा मन में प्रभु का स्मरण चलता रहें। जय श्री राधे

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