श्रीमद् भागवत गीता का 13 अध्याय का सरल अर्थ

    श्रीमद् भागवत गीता का 13 अध्याय का सरल अर्थ


संसार में एक परमात्मा तत्व ही जानने योग्य है। उसको जरूर जान लेना चाहिए। उसको तत्व से जानने पर जानने वाले की परमात्मा तत्व के साथ अभिन्नता हो जाती है।
 जिस परमात्मा को जानने से अमरता की प्राप्ति हो जाती है ,उसे परमात्मा के हाथ, पैर,सिर, नेत्र , कान सब जगह है।वह संपूर्ण इंद्रियों से रहित होने पर भी संपूर्ण विषयों को प्रकाशित करता है, संपूर्ण गुणों से रहित होने पर भी संपूर्ण गुणों का भोक्ता है और आसक्ति रहित होने पर भी  सबका पालन पोषण करता है। वह संपूर्ण प्राणियों के बाहर भी है और भीतर भी है, तथा चर अचर प्राणियों के रूप में भी वही है, संपूर्ण प्राणियों में विभक्त रहता हुआ भी वह विभाग रहित है। वह संपूर्ण ज्ञानो का प्रकाशक है वह संपूर्ण विषम प्राणियों में सम रहता है। गतिशील प्राणियों में गति रहित रहता है। नष्ट होते हुए  प्राणियों में अविनाशी रहता है। इस तरह परमात्मा का यथार्थ जान लेने पर परमात्मा को प्राप्त हो जाता है।


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