हमें क्रोध क्यों नहीं करना चाहिए?
प्रभु कृपा से बुद्धि शुद्ध और सात्विक रहे ।परस्पर प्रेम बनाए रखें। किसी से कोई भूल हो तो उसे क्षमा करें , उसे समझा दे, क्रोध ना करें, जिसके ऊपर क्रोध किया जाता है ,उसकी हानि नहीं होती है ।जो क्रोध करता है ,उसी का रक्त जलता है ।क्रोध करने से बुद्धि का नाश होता है। विकास की गति मंद हो जाती है ।क्रोध से हिंसा के और बदला लेने के भावों का उदय होता है। उसे बार-बार जन्म मरण होता है ।जन्म लेना है ,सत्संग भजन के लिए। बदला चुकाने के लिए नहीं, इसलिए क्रोध से बचना चाहिए ।कभी क्रोध आ जाए ,तो मौन हो जाना चाहिए और जब आप शांत हो जाएं तो विचार जरूर करना चाहिए। जय श्री राधे( दादा गुरु भक्तमाली जी के श्रीमुख से)
प्रभु कृपा से बुद्धि शुद्ध और सात्विक रहे ।परस्पर प्रेम बनाए रखें। किसी से कोई भूल हो तो उसे क्षमा करें , उसे समझा दे, क्रोध ना करें, जिसके ऊपर क्रोध किया जाता है ,उसकी हानि नहीं होती है ।जो क्रोध करता है ,उसी का रक्त जलता है ।क्रोध करने से बुद्धि का नाश होता है। विकास की गति मंद हो जाती है ।क्रोध से हिंसा के और बदला लेने के भावों का उदय होता है। उसे बार-बार जन्म मरण होता है ।जन्म लेना है ,सत्संग भजन के लिए। बदला चुकाने के लिए नहीं, इसलिए क्रोध से बचना चाहिए ।कभी क्रोध आ जाए ,तो मौन हो जाना चाहिए और जब आप शांत हो जाएं तो विचार जरूर करना चाहिए। जय श्री राधे( दादा गुरु भक्तमाली जी के श्रीमुख से)
